प्रार्थना

दूसरों में कमियां ढूंढने की बजाय, आत्म अवलोकन करना प्रार्थना है। अपनी कमियां उदारता से स्वीकार करना व दूसरों के गुणों की जी खोलकर प्रशंसा करना प्रार्थना है। स्वयं को समझा बुझा कर – ईर्ष्या, द्वेष, गुस्सा, कुंठा, जलन, दूसरों की तुलना करने से दूर रहना प्रार्थना है।

जीवन के हर छोटे-बड़े प्रसंग को, घटना को अपना अहोभाग्य मान स्वीकारते हुए, अपने विवेक-विचार और आत्मबल द्वारा जीवन को और अधिक श्रेष्ठ बनाना एवं अपने इस ईश्वर-प्रदत्त जीवन की वीराटता -अनन्तता को हासिल करने का निरन्तर प्रयास करना प्रार्थना है।

ईश्वर में आस्था रखने व उनके प्रति समर्पित भाव से जीना ही प्रार्थना है।

आपके शुभ संकल्प, आपका धैर्य-साहस, उत्साह, सरलता तथा सहजता हर परिस्थिति को आपके अनुकूल बना दे और आपके कठिन से कठिन कार्य जल्द ही सिद्ध हो जायें, आप हमेशा स्वस्थ रहें और खुश रहें, ऐसी मेरी हनुमान जी से प्रार्थना है। मंगल शुभकामनाएं। 💐

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