रामनवमी विजयदशमी दशहरा

लोग कहते हैं राम ने रावण को मारा। मगर सच तो यही है कि रावण जो चारों वेदों का ज्ञाता था, उस समय का सबसे बड़ा शिव उपासक था, इतना योग्य, सक्षम, ज्ञानवान और बलवान था कि उसे दस राम मिलकर भी नही मार सकते थे। उसे तो उसके अपने अहंकार, क्रोध, अधार्मिक कार्यों ने तथा चारित्रिक पतन ने मार डाला। उसने स्वंय का अंत खुद ही किया। मेरी राय में तो सच यही है।

और अगर आप अपने चारों तरफ देखेंगे तो पाएंगे कि अक्सर विजय-विभूति, अपार सफलता, शक्ति – सामर्थ्य प्राप्ति के बाद लोगों में उपजी अहमन्यता, चमक-धमक, आडंबर, गोरखधंधे, दबंगई, उन्माद एवं घमंड उनके जीवन सौंदर्य को पूर्ण रूप से धूमिल कर देता है और धीरे धीरे उनकी सभी श्रेष्ठतायें खत्म होती चली जाती हैं। और फिर उनका अंत हो जाता है।

सरलता-उदारता-विनम्रता, शिष्टता, निरभिमानता मनुष्य को महानता के उस शिखर पर बनाये रखती है। उम्मीद है कि आप अपनी श्रेष्ठता, दिव्यत्व और अपने दैवत्व को बनाये रखेंगे, जीवन ईश्वरीय उपहार है, ये प्रासादिक भाव बनाये रखेंगे और सदैव ईश्वरीय विधान के प्रति समर्पित रहेंगे।

आपकी नेक नियति, उच्च-आचरण, एकाग्रता, दृढ़-संकल्पबद्धता, महान कार्य तथा शुद्ध विचार आपकी दिव्य पहचान को सदियों तक बनाये रखें, ऐसी मेरी कामना है।

मैं हम सभी के प्रभु श्री राम से प्रार्थना करता हूँ कि आपके परिवार, समाज, दुनिया मे आपसी प्रेम, सौहार्द एवं सदभावना बनी रहे। आपका घर-आंगन रौशनी से झिलमिलाता रहे, इसमें खुशियाँ चहकती रहें तथा सदैव सुख, समृद्धि और रंगों की बहार बनी रहे।

आपको और आपके परिवार को #रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

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