प्रार्थना

मैं साधरणतः उस ईश्वर की बात नही करता जो कंही दूर परलोक में विराजमान हैं, जो हम सबके मालिक हैं। मैं उनको मानता जरूर हूँ। मैं उनके प्रति अपनी श्रद्धा निरंतर प्रकट करता हूँ।

मगर मैं उस विचार से ज्यादा प्रभावित हूँ जो ये कहता है कि ईश्वर इस सृष्टि के कण कण में मौजूद है। आप में, मुझ में और सभी मे। न कुछ ज्यादा – न कुछ कम, सामान रूप से।

मेरा मानना है कि आपके भीतर जो चेतना है, प्राण है, वही उनके आपके भीतर होने की पहचान है। जो बौद्ध आपके भीतर है – वही बुद्धत्व है और जो आनंद आपके अंदर है – बस वही सचिदानंद है।

इसीलिये ये पता करना कि आपके भीतर ऎसा क्या भर गया है जिसने इस अद्भुत ख़ज़ाने को ढक लिया है, प्रार्थना है। स्वर्ग में बैठे ईश्वर को प्राप्त करना ब्रह्मऋषियों का काम है। मेरे और आपके लिए तो अपने भीतर छुपे हुऐ अम्रतकलश को एवं परिपूर्णता को ढूंढ लेना, अनुभव करना, अपने भीतर के परमांश के प्रति सजग, जिम्मेदार और श्रद्धालु हो जाना और बने रहना ही एक मायने में प्रार्थना है।

इसीलिए अपने अंदर जो कूड़ा करकट जमा हो गया है – लालच, क्रोध, ईर्ष्या, दोगलेपन, ओछेपन तथा अहंकार का – जिसने हमारे ईश्वरीयतत्व को ढक लिया है – इस गन्दगी को लगातार साफ करना ही प्रार्थना है।

मेरे आराध्य प्रभु से प्रार्थना है कि आपकी आगे की जीवन यात्रा सुंदर, सरल एवं सुगम हो जाये। आपके असंतोष, अस्वस्थता और आपकी सभी समस्याओं का जल्द ही अंत हो जाये। जितने अम्रत, आनंद, बुद्धता और सफलता के आप अधिकारी हैं, वो जल्द से जल्द आपको प्राप्त हो जाये।

मंगल शुभकामनाएं 💐

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