अंधेरे के बादल हमेशा उम्‍मीद की किरण ले कर आते हैं।

कुछ लोग आज कल ये कहने लगे हैं कि संसार मेरे लिये भय और अन्धकार की जगह बन गया है। मेरे चारों ओर मुसीबतों के पहाड़ खड़े हो गये हैं। मैं बड़ा दुःखी हूँ और मेरे जैसा दुःख संसार में किसी पर ही शायद आया होगा। मैं इस जीवन से अब ऊब गया हूँ, हार गया हूँ। ऐसी आहों, कराहों और विषादपूर्ण बातों से सभी का सिर भारी कर रहे हैं, भय और निराशा का माहौल बना रहे हैं बढ़ा रहे हैं।

इस संसार और जीवन में कष्ट और कठिनाइयां तो लगी ही रहती हैं। मुझे बताईये संसार मे क्या कभी भी ऐसा कोई हुआ है, जिसके जीवन में हर क्षण केवल उजाला और आनन्द बना रहता हो, जिसे कभी भी किसी संकट का सामना नही किया हो। दुख, तकलीफें, संकट और विफलता के समय सब के जीवन मे बार बार आते हैं और आते रहेंगे। इससे जीवन भर के लिये निराश होने की जरूरत नही है।

मैं ये मानता हूं कि आज जैसी परिस्थितियों में निराशा किसी को भी घेर सकती है, ये कोई अचरज की बात नही है। मगर निराशा आपके अंदर घर कर जाए और आपको सदा सदा के लिए मानसिक रोगी बना दे ये उचित नही है।

यदि आपमें भी इस बंद और कोरोना की वजह से बनी इन परिस्थितियों की वजह से या अन्य किन्हीं कारणों से निराशा का भाव आ गया हैं, तो तुरन्त ही उसे अपने मन से निकाल डालिये। अपने साहस और उत्साह का सम्बल उठा कर खड़े हो जाइये। आप देखेंगे कि आपका आत्म विश्वास, आपकी शक्तियों और क्षमतायें जो निराशा की दशा में आपसे दूर हो गई थी, दौड़कर फिर चली आयेगी।

आप जानते हैं मगर फिर भी – रात के अंधेरे को ही ले लीजिये। हर रात को चारों ओर अन्धकार छा जाता है। हमारे जीवन के सारे काम बन्द हो जाते है। मगर हम सब उसको सहन करते हैं, काटते हैं। न तो कोई घबराते हैं, न हाय – हाय करते हैं और न ही रोते – चिल्लाते हैं। क्यों ? इसलिये कि हर काली रात के पीछे एक प्रकाशमान दिन तैयार रहता है। सभी को विश्वास है कि रात बीतेगी और शीघ्र ही प्रभात आयेगा। चिन्ता की बात तो तब हो, जब रात का अन्त सम्भव न हो और प्रभात की सम्भावना न रहे। ऐसा कभी होता है क्या?

मेरा यकीन मानिये की ये कठिन कोरोना काल, आपका अभी का दुःख और कठिनाइयां भी एक प्रकार की रात ही है। और रात के अंधेरे की तरह इसका अस्तित्व भी स्थायी नहीं है। शीघ्र ही इस बीमारी और इस बीमारी से पैदा हुई परिस्थितियों का समाप्त हो जाना निश्चित है। इसका अस्तित्व कुछ समय के लिये घिर आये काले अन्धेरे बादलों की तरह ही है, जो शीघ्र ही अपने आप कट जाते है। यह प्रकृति का एक अटल नियम है ।

मैं आपको एक बार पुनः याद दिलाता हूं कि – बड़े से बड़ा संकट आ जाने और कठिन से कठिन परिस्थिति खड़ी हो जाने पर भी अपना कर्तव्य और आशा का साथ न छोड़ने वाले अन्ततः विजयी होते हैं। हमारे पूजनीय रामायण और महाभारत जैसे महान ग्रन्थ ऐसी कथाओं से भरे पड़े हैं।

जो लोग हँसते खेलते अपनी बाधाओं और तकलीफों से टक्कर लेते हुए आगे बढ़ते चले जाते हैं वो अंत मे इतिहास बना जाते हैं। आप भी उठिए और अपनी शक्तियों के साथ आगे बढ़ने का मन बनाईये, विजय आपके साथ आयेगी। मेरा विश्वास करिये।

केवल बीमार, निराश, हताश, उदास और निरुत्साही बनकर पड़े रहने पर आप कुछ भी भला नहीं कर पायेंगे, और ये जो आपकी खराब स्थिति हैं जिसमे आप कष्ट भोग रहे हैं, वह भी दूर नही होगी। कभी नही। आपके जीवन में मनोवाँछित परिवर्तन तभी आ पायेगा, जब आप निराशा से अपना पल्लू छुड़ा कर आशावादी बनेंगे, उत्साहपूर्वक, अच्छी और सरस बातें करने लगेगें। याद रखिये की साहस, उत्साह, सकारात्मकता और आशा का प्रकाश लेकर चलने वालों के मार्ग से एक न एक दिन अन्धकार छंट ही जाता है।

प्रार्थना करें और विश्वास रखें की सब ठीक हो जायेगा और शायद पहले से बेहतर। कौन जानता है कि आप चमत्कार की, सफलता की और साहस की कोई ऐसी कोई कहानी गढ जाएं लिख जायें जिसे सदियों तक याद रखा जाये और जिससे न सिर्फ आपकी आने वाली पीढियां बल्कि संसार भी प्रेरणा ले पाये।

मैं अपने आराध्य प्रभु से आज प्रार्थना करता हूँ की अंधकार से प्रकाश, सुखद जीवन, विकास और उन्नति के लिये, आपसी सौहार्द्र तथा सभी के उत्साहवर्धन के लिए के लिये किये गये आपके सभी प्रयास निरन्तर सफल हों। आप सदैव स्वस्थ और सुरक्षित रहें। मंगल शुभकामनाएं 💐

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