प्रार्थना

आंखें बंद करके कुछ समय तक सर्वशक्तिमान और सचिदानंद परमात्मा का गुणगान करना, किसी एक मुद्रा में बैठ कर मन्त्रजाप करना, महान धर्मग्रंथों का पाठ करना तथा कुछ समय के लिये स्वंय को एकाग्रचित और शान्त कर लेना सदैव हितकारी है और प्रार्थना करने का एक तरीका भी है।

मगर मेरे अनुसार तो असल प्रार्थना तब है जब हम हमारे इन प्राचीन, पवित्र और महान धर्मग्रंथों पर अमल करना शुरू कर दें। केवल इन्हें पल दो पल के लिए पढ़ना या दोहराना पूर्ण प्रार्थना नही हो सकती है। मेरे विचार में इन्हें अपने व्यवहार, कार्य, स्वभाव आदतों में शामिल करना ही वास्तविक प्रार्थना होगी।

केवल उनका गुणगान करने से भी शायद बात नही बनेगी। किसी चमत्कार या रहस्य को प्राप्त करने से भी कोई बात नही बनेगी। बल्कि खुद को पूरी तरह से उनके रूप में ढालना, रूपांतरित करना और उनके जैसे होने से ही असल बात बनेगी। उनके जैसे होना – दिखना शुरू करना ही उनकी असली वाली प्रार्थना होगी, उनका अभिवादन होगा, सत्कार होगा और उनके अनुग्रह के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना होगा।

और अगर आपको सही मायनों में उनकी असीमित कृपा और अनुकंपा का मज़ा लेना है, स्थायी रूप में सफल होना है, आनंद से भरे रहना है तो आपको इसी पल से अपने हर छोटे-बडे, जरूरी-बेकार, अच्छे-बुरे काम को उनका काम समझकर मन लगाकर करना शुरू करना होगा तथा उन्हें निस्स्वार्थ भाव से समर्पित करना शुरू करना होगा – यकीन मानिये – आपका जीवन और संसार तुरन्त आनंद से भर उठेगा और आप कभी भी अशांत, असंतुष्ट, व्यग्र, बेचैन, अधीर और कुन्ठित नही होंगे।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि आपकी सभी प्रकार से की गई प्रार्थनायें फलित हों ​और आपके सभी मनोरथ जल्द ही पूर्ण हों।

मेरी उनसे ये भी प्रार्थना है की आपको तथा आपके पूरे परिवार को सभी परेशानियों से दूर रखें तथा नित्यनूतन खुशियां आपके घर आंगन को शुशोभित करती रहें।

आप को शतायु, स्वस्थ, सशक्त और प्रगतिशील जीवन के लिये ढेरों ढेर मंगल शुभकामनाएं 🙏

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