खुश रहना आपकी बुनियादी जिम्मेदारी है।

मुझे नहीं लगता कि ईश्वर कभी भी चाहता है कि आप गंभीर रहें, सुस्त रहे, निराश हों या उदास दिखें। मैंने आज तक एक भी पेड़ पौधा उदास नहीं देखा है। मैंने एक भी पक्षी गम्भीर – चिंता में नहीं देखा है। मैंने एक भी सूर्योदय निराश नहीं देखा है। मैंने कोई भी तारों वाली स्याह रात असुंदर नहीं देखी है। मुझे तो ऐसा लगता है कि वे सब अपने-अपने तरीके से हंस रहे हैं, खुश हो रहे हैं, अपने-अपने तरीके से नाच रहे हैं। हम भले ही इस बात को समझें या न समझें, माने या न माने, लेकिन मुझे लगता है ये पूरी की पूरी सृष्टि और सारा अस्तित्व अपने आप में एक उत्सव है और सब के सब अपनी अपनी मस्ती में मगन हैं।

ध्यान रखें कि खुश और मस्त रहना आपकी भी बुनियादी जिम्मेदारी है। किसी इंसान की पहली और सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक खुशमिजाज प्राणी होने की ही है। खुश रहना जीवन का चरम पहलू नहीं है, यह जीवन का बुनियादी पहलू है। अगर आप खुश नहीं हैं, तो आप अपने जीवन में क्या कर सकते हैं ? पहले पहल आप को खुश होंना सीखना होगा, तभी दूसरी महान संभावनाएं खुलेंगी अन्यथा नही। कुछ भी जोर लगा लें।

कुछ भी यानी के दुख, तकलीफ, निराशा या कष्ट हम पर बरसाया नहीं जा रहा है, उसे पैदा किया जा रहा है और उसे बनाने वाला कारखाना हमारे मन में है। अब इस कारखाने को बंद करने का समय आ गया है। मन से अपने बुनियादी अस्तित्व यानी के स्व भाव के यानी के खुश रहने की मूल प्रवर्ति की ओर बढ़ें। विश्वास रखिये, सब बढ़िया होगा।

एक बात और – आपको प्यार, सम्मान, खुशी या सुख को तलाशना नही शुरू करना है। कतई नही। इस लेख को पढ़ कर अपनी खुशी को अभिव्यक्त करना शुरू करना है। कुछ भी पाना नही है या ढूंढना नही है – बस जो है उसे अभिव्यक्त करना है। यही सारा खेल है। याद रखिये की खुशी का स्रोत आपके भीतर ही छुपा हुआ है, आप उसे हमेशा के लिए एक जीवंत अनुभव और अपनी पहचान बना सकते हैं। खुश रहिये – मस्त रहिये।

उम्मीद है समझ आयेगा। बताईयेगा जरूर 🙏

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