रविवारीय प्रार्थना 🙏

मुझे या आपको निराकार परमात्मा को किसी वस्तु की तरह प्राप्त नही करना है। वास्तव में हमे तो उस पूर्ण और शाश्वत परमात्मा का जो परमतत्व हमारे भीतर मौजूद है उसे प्रकट करना है अपनी प्रवृत्ति से, अपने विचारों से, गुणों से, चरित्र से, व्यवहार से और कार्यों से।

इसीलिये हमे अपनी ऊर्जा उसे जगाने पर लगानी होगी जो भीतर तो है मगर बरसों से सो रहा है। हमें प्रार्थना, भाव और संकल्प की छैनी से अपने भीतर मौजूद परमात्मा की मूर्ति को निखारना शुरू करना होगा। अंतर ज्योति प्रज्वलित करनी होगी जिससे सारा अंधकार कट जाये, जो भी व्यर्थ है वो छट जाये, जो भी कच्चापन है, अनगढ़ है, बेढ़ंगा है, जो बेअदबी और घमंड है वो गायब हो जाये और हमारा पूरा जीवन जगमग जगमग हो जाये।

इसीलिये अपनी चिन्मय ज्योति की लौ को प्रज्वलित करना और उसे सम्हाले रखना सही मायने में उनकी प्रार्थना है।

चूंकि हमारा जीवन दाता स्वयं सत्-चित् और आनंद स्वरूप है, इसीलिए स्वंय को सत्-चित्-आनंद स्वरूप बनाने की निरंतर कोशिश ही उनकी सच्ची प्रार्थना है।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि आपकी आत्मा की उच्चतर शक्ति, सामर्थ्य, ऊर्जा तथा आपके भीतर जो परमात्मा का प्रकाश अब तक छुपा हुआ था वो जल्द ही अनवरत हो जाये और आपके जीवन तथा घर-संसार को सुखमय, उल्लसित एवं प्रकाशमान कर दे।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु से प्रार्थना करता हूँ की आपका आने वाला प्रत्येक नया दिन गौरवपूर्ण हो तथा आपके चारों तरफ शांति, समरसता और हर्ष का वातावरण सदैव बना रहे। मंगल शुभकामनाएं 💐

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