रविवारीय प्रार्थना

हम सब परमात्मा, उनके स्वरूप, स्वभाव और गुणों को जानते हैं। उनका गुणगान भी करते ही हैं किसी न किसी रूप में। ये भी लगभग हम सब को मालूम है की वो कर्मफल दाता (परमात्मा) सबके भीतर बैठा है और वही तो सब की अंतरात्मा हैं। हम सबको ये भी मालूम है कि हमारे जीवन का प्रमुख लक्ष्य हमारे “मैं” को मिटा कर हमारे भीतर के अव्यक्त परमात्मा को दृढ़ता पूर्वक व्यक्त करना है और उनकी सत्ता का अनुभव एवं साक्षात्कार कर कभी न समाप्त होने वाले परम् आनन्द को प्राप्त करना है।

बताईये क्या आप को ये सब मालूम नही है?

परन्तु असल मे तो हम उस अमरत्व की, परमात्मा (अंतरात्मा) की उस परम् आनन्द की खोज कर ही नही रहे हैं। उनको मान ही नही रहे हैं। हम तो सिर्फ अपने अहंकार को बढ़ाने, अपनी अस्मिता और अपने “मैं” के भाव को पोषित करने में लगे हुए हैं। बस शोर मचाने में लगे हुए हैं, आडम्बर रचने में लगे हुऐ हैं।

हमारी नियति ने, यानी के उन्होंने ही तो हम पर असीमित कृपा करते हुए हमे मनुष्य बनाया है जिसका मतलब है अनन्तताएँ, विराटताएँ, सामर्थ्य, माधुर्य, सौन्दर्य, आनन्द और अनन्त दैवीय संभावनायें उपलब्ध करवा रखी है। हम सबको ईश्वरीय विराटता और स्वर्ग पहले से ही उपलब्ध है। बस हमारा काम है वो अवस्था, व्यवस्था बनाये रखना जो हमें ईश्वर की सत्ता से जोड़े रखे, भटकने नही दे, जिससे हम निष्ठा पूर्वक अपने अपने दायित्वों और कर्तव्यों का निर्वाहन करते हुए सुगमता से परम गंतव्य को प्राप्त कर सकें।

आज मेरा आप से निवेदन है कि उन्हें (परमेश्वर) अपने भीतर पूर्ण रूप से प्रतिष्ठित हो जाने दें… उनको अपना सम्पूर्ण अधिग्रहण करने का एक मौका दीजिये, उन्हें अपने भीतर से प्रकट होने की इजाजत दीजिये, उन्हें अपने “मैं”, अपनी मूर्खताओं, अपने अहंभाव और नकारात्मक विचारों का बंधक बनाने का प्रयास बन्द कर दें… सच मानिये इस से ज्यादा भला, इससे ज्यादा संतुष्टि, उपलब्धि या इस जीवन की नियती और क्या हो सकती है कि ईश्वर आपका – मेरा प्रयोग, अनुप्रयोग और उपयोग अपने प्रकटीकरण के लिए कर पाये। शायद यहि जीते-जी अपने होने की नियति प्राप्त करना होगा।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि आपको उनकी अनन्य-भक्ति प्राप्त हो और आप उनकी कृपा के सहज अधिकारी बन जायें। आपका अन्तःकरण प्रेम, करुणा, सद्भाव और सकारात्मक भावनाओं से भरा रहे तथा आपके भीतर सबके प्रति अपनेपन और सह-अस्तित्व की भावना सदा बनी रहे।

आपके श्रेष्ठ और स्वस्थ जीवन की कामनाओं के साथ साथ मैं आज उनसे प्रार्थना करता हूँ कि आपके जीवन की दिशा जल्द ही बदल जाये, आप अपने असली गुण, स्वभाव, उद्देश्य, औचित्य और स्वधर्म को पहचान पायें तथा आत्मा की उन ऊँचाइयों तक जा पायें जो अकथनीय है। मंगल शुभकामनाएं 💐

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