रविवारीय प्रार्थना – इस दुनिया मे न ही तो कोई महत्वहीन है और न ही अयोग्य।

आज मैंने एक बहुत ही सुंदर लेख पढ़ा जिसके आधार पर मैं शर्तिया तौर पर कह सकता हूँ की इस दुनिया मे न ही तो कोई महत्वहीन है और न ही अयोग्य। क्योंकि अगर हम इस बात में विश्वास करते हैं कि हम सब ईश्वरीय अंश है या की हम उन्हीं की संतान हैं या की उसी प्रकृति ने हमे पैदा किया है जिसने अनेकानेक महान लोगों को यंहा पैदा किया है तो आप और मैं कैसे अयोग्य हो सकते हैं।

प्रकृति आपको और मुझे वही चांद और सूरज देती है जो उसने कभी कबीर या नानक को दिया। वही हवा पानी देती है जो उसने कभी बुद्ध और महावीर को दि। वही बारिश देती है जो उसने कभी गांधी और सुभाषचंद्र बोस को दी। वही गर्मी सर्दी देती है जो उसने कभी वैज्ञानिक बोस, रमण और भाभा को दी। वही जमीन और आकाश देती है जो उसने कभी दुनिया के महानतम संतों को दी, राजाओं को दी और उन सभी महान और सफलतम लोगों को दी जिनका हम और आप आज अनुकरण करते हैं।

सच मानिये कोई फर्क नहीं है, कोई भेद-भाव की जानकारी नहीं है। ईश्वर के लिये आप मे और उनमें कोई फर्क नही है। फर्क है तो बस इतना कि उन महान और सफल लोगों ने अयोग्य होने या रहने के विचार को स्वीकार नहीं किया और हम में से कुछ ने इसे स्वीकार कर लिया। बस।।

ईश्वर अपनी बनाई इस सृष्टि में कुछ भी अप्रसांगिक या अयोग्य चीजों का उत्पादन नहीं करता है, कभी नही। प्रकृति केवल योग्य चीज़ों को ही जन्म देती है। वो केवल उन्हीं चीजों को जीवों को बनाती है जिनकी जरूरत है। प्रकृति मूर्ख थोड़े ही है, वो तो सर्वश्रेष्ठ है, बुद्धिमान एवं बेहद सचेत है।

इसीलिये एक बार पुनः अपना और हर जीव का सम्मान करना और प्रभु के प्रति आभारी महसूस करना प्रार्थना है। अयोग्य होने का विचार छोड़ देना ही प्रार्थना है। ईश्वर के प्रति और प्रकृति के लिए आभारी होना प्रार्थना है…

इसीलिये निरंतर अपना आत्मावलोकन करना, अपनी योग्यता और अपनी समर्थता को पहचानना और प्रकृति द्वारा दी गयी जिम्मेदारी को निभाना प्रार्थना है। ईश्वर या प्रकृति को तुम्हारी सख्त जरूरत है, वे तुम्हारा सम्मान करते हैं, बस इस विचार का यथोचित सत्कार करना और इस बात का व्यवहार में लाना प्रार्थना है।

सब मंगल कामनाओं को पूर्ण करने वाले मेरे आराध्य प्रभु से आज मेरी प्रार्थना है की आपके जीवन से जल्द ही छल, कपट, ईष्र्या, द्वेष, प्रपंच और झूठ बोलने जैसे सभी विकार और दोष खत्म हो जायें, जिससे आपको जल्द ही उनका आशीर्वाद अनुभव हो पाये, मन की शांति और प्रसन्नता प्राप्त हो पाये, परम् आनंद उपलब्ध हो तथा असली अमृत प्राप्त हो पाये।

आपके सभी शुभः संकल्प और उद्देश्य जल्द ही पूरे हों, अभीष्ट फल की प्राप्ति हो तथा आने वाला प्रत्येक नया दिन आपके घर संसार में ढेरों ढेर नई खुशियां लेकर आये, इन्ही कामनाओं के साथ साथ मैं आज उनसे ये एक बार पुनः प्रार्थना करता हूँ कि आप सदैव स्वस्थ रहें और दीर्घायु हों। मंगल शुभकामनाएं 💐

One Comment on “रविवारीय प्रार्थना – इस दुनिया मे न ही तो कोई महत्वहीन है और न ही अयोग्य।

  1. आपका मनरूपी उपवन सदा फल फूलो से लदी रहे।

    आप भर्तिहरी के विचारों से सहमत नहीं दिखाते कि हमने वेदादीविद्या का अध्ययन कर पिता कि किरती को स्वर्ग तक नहीं पहुचाया हम तो केवल माता के यौवन रूपी उद्यान का उच्छेदन करने को कुल्हाड़ी के रूप में ही पैदा हुवे है।क्षमा चाहता हुँ पर विपरीत विचारों का संगम सबसे अच्छा तीर्थंस्थल होता है।

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