रविवारीय प्रार्थना – मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य तथा लाभ क्या है?

ये सामान्य सी बात आप जानते हैं कि जब भांप बन कर पानी आकाश की तरफ उड़ता है, तब भी प्राकृतिक नियमों का ही पालन हो रहा होता है और जब पानी नीचे की तरफ बहता है, तब भी प्राकृतिक नियमों का ही पालन हो रहा होता है।

ऊपर की तरफ ले जाने वाले नियम भी प्राकृतिक हैं और नीचे की तरफ ले जाने वाले नियम भी प्राकृतिक हैं। हम चाहें तो ऊपर की ओर जा सकते हैं नही तो नीचे। चुनाव आपको और मुझे करना होता है। यही चुनाव करने की स्वतंत्रता और योग्यता तो हमे पशुओं से बेहतर या कम से कम भिन्न तो जरूर बनाती है। क्योंकि पशु चाहे भी तो ऊपर की तरफ नही जा सकता है। वह चाह ही नहीं सकता है।

अपने जीवन को अपवित्रता से पवित्रता की ओर, घृणा से ब्रह्माण्डीय प्रेम की ओर, अपूर्णता से पूर्णता की ओर, अज्ञान से शाश्वत ज्ञान की ओर, दुर्बलता से असीम शक्ति एवं मृत्यु से अमरता की यात्रा ही एक मायने में ऊपर उठना है। ऊपर उठने से मेरा मतलब है बुद्ध हो जाना, श्री राम जैसा हो जाना। और नीचे गिरने का तो मतलब आप जानते ही हैं 🤭।

हमारे पास ऊपर उठने के लिखित तरीके हैं, उपाय हैं, नियम हैं। हम चाहें तो ऊपर की तरफ जा सकते हैं। कितने लाखों लोग हमसे पहले अपनी श्रेष्ठता को हांसिल कर चुके हैं। बस उस तरफ जाने के लिए कठिन श्रम करना होगा। क्योंकी स्वभाविक है कि जब आप ऊपर की तरफ जाओगे तो जान तो लगानी ही पड़ेगी। पहाड़ से उतरने में थोड़े ही कोई मेहनत करनी पड़ती है।

एक बात याद दिला दूँ – जितने आप ऊपर उठ सकते हैं, उसी अनुपात में नीचे भी गिर सकते हैं। जितने बड़े शिखर पर चढ़ने की संभावना है, उतनी ही बड़ी खाई में गिर जाने की भी संभावना साथ ही जुड़ी हुई है। शिखर और खाई साथ—साथ चलते हैं। पतन और विकास साथ—साथ चलते हैं। अगर आदमी पशु होना चाहे, तो सभी पशुओं को मात कर सकता है। लेकिन कोई भी पशु बहुत नीचे नहीं गिर सकता है। एक पशु नीचा गिर गया है और एक पशु ऊंचा है, ऐसा आप फर्क नहीं कर सकते।

आपके जो निम्नस्तरीय या बुरे कर्म हैं, सोच हैं, प्रवृतियां हैं वे सब के सब आज नहि तो कल दुख लायेंगी और जीवन को नरक बना देंगी। जो श्रेष्ठ वर्तियाँ हैं, आदते हैं, पुण्यकर्म और हमारा श्रम हमें स्वर्ग, भक्ति व ज्ञान की प्राप्ति के साथ ही ईश्वर की प्राप्ति करवाता है। यही मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य तथा एकमात्र लाभ भी है।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु जी प्रार्थना करता हूँ कि आपके सभी शुभ संकल्प जल्द ही पूरे हों जायें तथा आप शास्त्र सम्मत, माता-पिता द्वारा निर्देशित और अपने गुरू द्वारा उपदेशित मार्ग पर चलते हुए – सुकर्म करते हुऐ जल्द ही शाश्वत आनंद की प्राप्ति के अधिकारी जायें और अपनी श्रेष्ठता के शिखर पर पहुंच जायें।

मेरी प्रभु जी से ये भी प्रार्थना है कि आने वाले साल में प्रत्येक नया दिन आपके लिये शुभ समाचार लाये, अच्छा स्वास्थ्य, आनंदोत्सव और भव्य सफलता लाये। मंगल शुभकामनाएं 💐

श्री रामाय नमः। श्री राम दूताय नम:। ॐ हं हनुमते नमः।।

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