रविवारीय प्रार्थना – ईश्वर केवल उनसे ही प्रकट होते हैं, उन्हें ही प्राप्त होते हैं जो उनके अनुग्रह और उनकी मौजूदगी के प्रति सचेत रहते हैं।

हम सब जानते हैं और मानते भी हैं कि ईश्वर सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी, अनंत, शाश्वत और सर्वत्र हैं…वह अपनी इच्छा से कोई भी अवतार, रूप और आकार ले सकते हैं या निराकार रह सकते हैं। ईश्वर के बारे में ये सब और अधिकतर सब बातें ज्यादातर इन्सानों को मंजूर हैं। उन्हें खुश करने और प्राप्त करने के लिये हम सब तमाम तरह के जतन भी करते रहते हैं।

मगर आश्चर्य की बात ये है कि हमे एक बात कतई स्वीकार नहीं है और वो है कि ईश्वर का इंसान या किसी और जीव में होना। हमे सब कुछ मंजूर है लेकिन ये नही की परमात्मा ही जीवन है। ईश्वर ही हर किसी की हृदय की धड़कन है, श्वास है। ईश्वर ही सभी का चैतन्य है।

मुझे लगता की ये बात मानने में की ईश्वर संसार में सब के भीतर हैं या वो आसपास ही हैं, लोगों को तकलीफ है। वे इस बात को लेकर असहज हो जाते हैं क्योंकि वे सब कुछ मान सकते हैं मगर उन्हें अपने जीवन में ईश्वर की जरा-सी दखलअन्दाजी मंजूर नहीं है। उन्हें ईश्वर अपने निकट नहीं…बल्कि बहुत दूर चाहिए ताकि उनका ये भ्रम बना रहे कि वे अपने कर्मों और सोच को ईश्वर से छिपा सकते हैं… ताकि वे अपने पाखंड, झूठ, पाप, लालच, भ्रष्टाचार, धनलोलुपता, कुकर्म और एक दूसरे का गला काट कर आगे बढ़ने की प्रक्रिया को जारी रख सकें।

मुझे लगता की संसार में सभी में उनका अंश है मानने से कोई भी शायद ही किसी को दुख या धोखा दे पायेगा। फिर किसी को पीड़ा नही दे पायेगा या किसी से शत्रुता मोल लेने की उसे कोई जरूरत ही नही पड़ेगी। और ये सब कुछ किसी को भी मंजूर कैसे हो।

अगर आप रात-दिन अपने दुर्गुणों के प्रेत को जगाने और उसे अधिक और अधिक ताकतवर बनाने की मसान पूजा में लगे हुऐ हो और इसी काम में अपनी पूरी ताकत झोंक रख रखी है तो मालिक आपको ईश्वर कैसे प्राप्त होंगे, कैसे वे आप मे से प्रकट होंगे, कैसे आपको उनका अनुभव हो पायेगा।

ईश्वर प्राप्ति तो तभी सम्भव है जब हमारे मन में सब तरफ से श्रेष्ठ संकल्प, सोच विचार आएँ। जब हम अपने शुभ-गुणों के विकास में लग जाते हैं, नैतिक पुरूषार्थ में लगे रहते हैं और सरल, विनम्र और सदाचारी बने रहते हैं। दुनिया का कोई भी साधन और विधि प्रेम और सदाचार के बिना किसी को भी ईश्वरयी अनुभव नहीं करा सकता है।

इसीलिये एक बार पुनः मैं आपको याद दिला दूँ की अपने दुर्गुणों को खत्म करने और अपने सद्गुणों को विकसित करने का निरंतर प्रयास ही हम सब के लिये उनकी प्रार्थना है। अपने मन, वचन, कर्म से पवित्र और दिव्य बने रहना ही प्रार्थना है। भीतर से मुस्कुराना और अपनी इस मुस्कुराहट को दूसरों तक पहुँचाना ही प्रार्थना है। अपने जीवन में भौतिक उन्नती के साथ साथ आध्यात्मिक तथा पारलौकिक उन्नति के लिये भी प्रतिदिन पुरूषार्थ करना प्रार्थना है।

ईश्वर केवल उनसे ही प्रकट होते हैं, उन्हें ही प्राप्त होते हैं जो उनके अनुग्रह और उनकी मौजूदगी के प्रति सचेत रहते हैं। प्रभु के असीमित आशीर्वाद, अनुग्रह और कृपा के प्रति आदर भाव रखते हैं और लगातार कृतज्ञता व्यक्त करते रहते हैं।

सब कामनाओं को पूर्ण करने वाले मेरे आराध्य प्रभु से आज प्रार्थना है कि आपके भीतर सोई हुई ईश्वरीयता जल्द ही जाग उठे, असल सफलता का अंकुर फुट उठे तथा आपके जीवन मे सब कुछ शुभ होने लगे और आपकी मनोवांछित शुभ इच्छायें और प्रार्थनायें फलित होने लगें।

आपके उत्तम स्वास्थ्य, प्रसन्नचित मनोदशा और समृद्ध जीवन की कामनाओं के साथ साथ मैं आज उनसे ये भी प्रार्थना करता हूँ कि जल्द ही आप अपने उच्चतम आध्यात्मिक लक्ष्यों को प्राप्त कर लें। मंगल शुभकामनायें 💐

श्री रामाय नमः। श्री राम दूताय नम:। ॐ हं हनुमते नमः।।

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