रविवारीय प्रार्थना – परमात्मा आपका अपना चुनाव है।

परमात्मा जो आपके स्वयं के भीतर और आपके चारों ओर हर कण में विराजमान है वे अगर आपको दिख नही रहे हैं, अगर उनकी अनुभूति आपको नही हो रही है तो इसमें परमात्मा या किसी अन्य का कोई दोष नही है।

असल मे परमात्मा आपका अपना चुनाव है। अगर परमात्मा की अनुभूति आपको नही हो रही है तो इसका सीधा सा मतलब है की आपने अभी तक उन्हें सही मायनों में चुना ही नही है। क्योंकि जिसने भी उन्हें चुना, उन पर विश्वास करना शुरू किया, वे उसी क्षण उसे मिल गये, दिख गये, महसूस हो गए, एक पल की भी देरी के बगैर।

लेकिन आप ही अगर उन्हें न चाहो, तो वे कोई जबरदस्ती तो कर नही सकते हैं। आपको जन्मो जन्मो तक सच को न मानने की, परमात्मा को न चुनने की, उन्हें देखने की या उन्हें देख समझ कर भी अनदेखी करने की स्वंतत्रता है। यही स्वंतत्रता ही तो हमारा सबसे बड़ा सौभाग्य है और यही सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।

इसे इस तरह समझते हैं कि सूरज तो रोज़ आकर अपनी रोशनी – धूप सारी दुनिया पर बरसा ही रहा है। लेकिन आप स्वयं ही खिड़की – दरवाजे बंद करके अंधेरा कर के बैठें हों तो सूरज कोई जबरदस्ती तो कर नही सकता है। आपको ही बाहर आना होगा या बंद खिड़कियों को खोलना होगा। सूरज की रोशनी पाने के लिये कोई कृपा-याचना थोड़े ही करनी होती है बस अपनी बन्द आंखे खोलनी होती है। महाराज, बस यही कृपा अपने ऊपर आपको करनी है अगर ईश्वर को प्राप्त करना है या उनका अनुभव करना है।

आपको अगर उन्हें सही मायनों में प्राप्त करना है तो उन्हें समझना होगा, उन्हें अपने भीतर आत्मसात करना होगा। उन्हें चुनना होगा। अपने विचारों में सोच में कार्यों में महानता को लाना होगा, क्योंकि मेरा ये मानना है कि ईश्वर का एक रूप महानता है। ढोंग, पाखण्ड और दिखावे के लिये केवल पूजा पाठ करके उन तक नही पहुंचा जा सकता है। केवल सार्थकता, सकारत्मकता, परिष्कृत व्यक्तित्व और महानता से ही उन तक पहुंचा जा सकता है – इस बहुमूल्य जीवन के असल लक्ष्य को पाया जा सकता है।

इसीलिये अपने अन्तःकरण में ईश्वर की मौजूदगी को पहचान कर अपनी सोच, विचार और कार्यों में उनकी दिव्यता, उत्तमता, श्रेष्ठता और महानता को प्रकट करने के लिए सतत प्रेरित रखना ही सही प्रार्थना है।

आज मेरे आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना है कि आपके विचारों में दिव्यता, कर्म में महानता एवं श्रेष्ठता, वाणी में मधुरता व व्यक्तित्व में उच्चता बनी रहे और आपकी दिव्य चेतना की अनुभूति से सारा जगत सदैव सुगन्धित – आल्हादित होता रहे।

उनसे ये भी प्रार्थना है कि आपके जीवन में प्रतिक्षण प्रसन्नता, सम्पन्नता तथा शारीरिक एवं मानसिक आरोग्यता बढ़ती रहे। मंगल शुभकामनाएं 💐

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।

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