रविवारीय प्रार्थना – शास्त्रसम्मत जीवन जीने का ढंग ही प्रार्थना है।

मेरा ऐसा मानना है की कुछ लोग सच्चाई और ईमानदारी से, सभ्यता से, नम्रता से, सेवा करते हुए, अनुशासन में रहते हुए, बड़ों का आदर सम्मान करते हुए, सभी मे और स्वयं में जो राम निहित हैं उसका सम्मान करते हुए, परमात्मा के अहोभाव में भरे रहकर अपना जीवन जीते हैं। ऐसे लोग मनुष्य रूप में देवता होते हैं। ये लोग लगभग हर समय आनन्दित प्रफुल्लित एवं उत्साहित दिखाई पड़ते हैं। उनके चेहरे पर एक अजीब सी चमक रहती है।

वंही बहुत से दूसरे ढंग के लोग भी हैं, जो जीवन में सिर्फ ढोंग करते रहते हैं। ढोंग करने से मेरा तात्पर्य है कि वे बाहर से दिखावा तो ऐसा करते हैं, कि जैसे उन्हें बहुत ज्ञान है, जैसे वे बड़े विनम्र हों, चरित्रवान हों, परोपकारी आदि हों। परंतु वास्तव में उनके जीवन में ये गुण होते नहीं। हैं। इन लोगों के अंदर सिर्फ झूठ छल कपट भरा रहता है। केवल मैं और मेरा भरा रहता है। वे सिर्फ दम्भ दिखाते हैं, घमण्ड करते हैं, अक्सर बेवजह क्रोध करते रहते हैं, अपने स्वभाव में कठोरता रखते हैं और अविवेकी होते हैं। असल मे तो ये मनुष्य होने के बावजुद आसुरी प्रवर्ति के होते हैं।

मेरा काम है आपको शास्त्रसम्मत कुछ बातें दोहराना और याद दिलाना। दोनों जीवन जीने के ढंग, तरीके और रास्ते आपके सामने हैं, आपकी यात्रा है – आपकी इच्छा है, जो आपको अच्छा लगे, उस पर चलिए।

आपको जो भी उचित लगे, लेकिन मेरा यही मानना है कि जो लोग आत्मवान हैं, सही में ज्ञानी हैं, भीतर से संत हैं, जो जाग्रत हैं और जो सांसारिक रूप से अपने परिवार, मित्रों, समाज, विश्व के प्रति उत्तरदायित्व से सदा भरे रहते हैं, जिनमे अहंकार लेशमात्र भी नहीं होता है, जो सन्यास और संसार दोनों में कुशल होते हैं – जो केवल बाहर से ही नही भीतर से भी संपन्न होते हैं वे ही उत्तम जीवन जीते हैं, बकुण्ठ प्राप्त करने के पात्र बनते हैं।

इसीलिये अपने विचार, व्यवहार और कार्यों में शुद्धता और भगवत भाव को बनाये रखना प्रार्थना है। हमारे वेदों और शास्त्रों में जिस ढंग के जीवन जीने का विधान दिया गया है उसे आनंदपूर्वक और निष्ठा से जीना प्रार्थना है। संसार में अपने धर्म के अनुसार कर्तव्यों का ईमानदारी और जिम्मेदारी से निर्वाह करना, सादगी व नम्रता से उच्च स्तर का जीवन जीते हुए सरल बने रहना, दूसरों की खुशियों में खुश रहना और निरन्तर ईष्ट देव और आराध्य के रूप में उनका चिंतन-मनन करते रहना ही हमारी प्रार्थना है।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु से प्रार्थना करता हूँ की आपके जीवन की दैनिक क्रियाओं में अधिक से अधिक सज्जनता, पवित्रता और दिव्यता आ जाये, सकारात्मकता, सहजता और सरलता आ जाये जिससे आपको उन की कृपा-आशीष-अनुग्रह का अनुभव होने लगे।

आपके उत्तम स्वास्थ्य, प्रसन्नचित मनोदशा और समृद्ध जीवन की कामनाओं के साथ साथ मैं आज उनसे ये भी प्रार्थना करता हूँ कि जल्द ही आप अपने उच्चतम जीवन लक्ष्यों को प्राप्त कर लें। मंगल शुभकामनायें 🙏

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