रविवारीय प्रार्थना – सब के लिये मंगल भाव रखना, मंगल कामना करना और अपना स्वंय का मित्र हो जाना भी प्रार्थना है।

ये ठीक बात है कि हमारे लिए महान संत बन कर जन-जन के हितकारी कार्य करना बहुत मुमकिन बात नही है और न ही पृथ्वी के अंदर गड़े हुए कीमती हीरे और अन्य रत्नों को खोद कर निकालने जैसा कठिन कार्य करना। पर क्या सब के लिये मंगल भाव रखना, मंगल कामना करना और अपना स्वंय का मित्र हो जाना भी कठिन है? जी नही, बिल्कुल नही।

उठते-बैठते, चलते-फिरते, खाते-पीते; हर अवस्था में बस मंगल भाव रखना, मंगल कामना करना और अपना मित्र बने रहने का प्रयास करते रहना भी एक प्रकार की प्रार्थना ही है और ये प्रयास आप अपने कार्यों से, गतिविधियों से या वाणी से कर सकते हैं अथवा मन ही मन में भी कर सकते हैं। जैसा आपको अच्छा लगे, उचित लगे और जो आपके सामर्थ्य में हो।

जब आप मंगल मैत्री, भावना और कामना का निरंतर अभ्यास करते रहते हैं तो जाने अनजाने में यही आपका कर्मकांड बन जाता है और यही पूजा – पाठ – मंत्र – जाप बन जाता है। मैं आपको बता दूं कि ये मंगल मैत्री, भावना और कामना परमात्मा को अति प्रिय है।

बगैर किसी स्वार्थ के जब आप दूसरों के लिये मंगल कामना करते हैं तब उनमे विराजित परमात्मा आपको आशीर्वाद देता ही देता है। जब आप स्वयं के मित्र हो जायेंगे (मंगल मैत्री) तो आप ऐसा कोई भी काम कैसे कर पायेंगे, जिससे आपको स्वयं के किये हुए की वजह से या कहे हुए की वजह से दुख प्राप्त हो।

आज मैं अपने आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना करता हूँ कि आप को इतनी सुबुद्धि और आत्मबल तो जरूर दे दें जिससे की आप तुरन्त प्रभाव से कम से कम वो काम करने बन्द कर दें जिससे आप हज़ारो बार दुख पा चुके हैं, वो बात करना बंद कर दें जो आपको हज़ारों हजार बार मुश्किल में डाल चुकी है तथा वो व्यवहार करना बंद कर दें जो आपको कई बार धक्के खिलवा चुका हैं।

उन से आज ये भी विनती कि जल्द ही आपके मन और मस्तिष्क की सारी कलुषता धूल जाये, आपके सत्कर्मों में, सत्प्रवृत्तियों में और सदस्वभाव में बढ़ोतरी हो जाये, आपकी दैवी सम्पदा में तेजी से वृद्धि हो जाये तथा आपके घर आंगन में आरोग्य, आनन्द, शान्ति, प्रेम, सुख-समृद्धि की वर्षा सदा होती रहे। मंगल शुभकामनायें 💐

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।

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