माना कि आप अकेले वातावरण को नही बदल सकते लेकिन अपने भीतर को पवित्र और शुद्ध तो कर ही सकते हैं।

मैं ये मानता हूं कि प्रकृति का संरक्षण और शुद्ध पर्यावरण का निर्माण एक जटिल समस्या है। इसके लिए सरकारों, उद्योगों और आम लोगों के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। लेकिन अपने भीतर शुद्धता और पवित्रता पैदा करना तो आपका अपना काम है।

याद रखिये कि हम अपने अन्तःकरण की शुद्धता से अपने अच्छे व्यवहार और कार्यों से न सिर्फ अपने आसपास सुखद और आनंद के वातावरण तथा स्वच्छ सुंदर परिवेश को तैयार कर सकते हैं, बल्कि ईश्वरीय कृपा भी प्राप्त कर सकते हैं।

आंतरिक पवित्रता से मेरा अभिप्राय है अपने तन, मन और आत्मा को छल-कपट, धूर्तता और मलिनता से मुक्त करना – खाली करना एवं सरलता, सहजता, निर्मलता, शुचिता, परंपरानुकूलता, सत्यनिष्ठा, निर्दोषिता, साधुता और बड़प्पन से भर लेना। अपने विचारों में, सोच में, दैनिक कार्यों में महानता दिव्यता लाना ही हमें परमात्मा के अनुग्रह का पात्र बनाता है।

अगर आप अपने भीतर को नहीं बदल सकते तो अपने बाहर को या वातावरण को कैसे बदलेंगे?

आईये आज इस पावन पर्व पर अपने व्यक्तिगत स्वार्थों और लालच से ऊपर उठकर अपने आस पास की धरती को स्वच्छ और स्वस्थ रखने का तथा #पर्यावरण को #प्रदूषण मुक्त करने का एक बार पुनः संकल्प करें और प्रयास करना शुरू करें।

गोधन एवं प्रकृति की उपासना के अनुपम पर्व, #गोवर्धन_पूजा और #अन्नकूट उत्सव की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान #श्रीकृष्ण की कृपा दृष्टि और उनका आशीर्वाद आप सभी पर सदैव बना रहे। मंगल शुभकामनाएं 💐

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