रविवारीय प्रार्थना – प्रतिपल सात्विक प्रवृत्तियों का संग्रह करते रहना और शुभ कर्मों में संलग्न रहना।

मुझे लगता है कि हम में से हर व्यक्ति की कामना होती है कि जिस समाज में वह रहता है, वहां उसे मान-सम्मान, यश-कीर्ति, प्रतिष्ठा और भरपूर धन-धान्य मिले। ये इच्छा तो लगभग हम सब मे एक सी होती है मगर हमारे कर्म, हमारी सोच और संकल्प अलग अलग होते हैं, योग्यता और पात्रता अलग अलग होती है तथा श्रेष्ठता एवं कौशल का स्तर अलग अलग होता है।

ईश्वर की ऊर्जा और कृपा तो अनवरत रुप से प्रत्येक स्थान पर समान रुप से बरस रही है, जिसकी जितनी पात्रता वह उतना ही ग्रहण कर पाता है। जिस प्रकार वर्षा प्रत्येक स्थान पर समान होती है, लेकिन गढ्ढे, नदी, नाले और समुंदर अपनी अपनी पात्रता अनुसार जल संग्रह कर पाते हैं उसी प्रकार हम भी अपनी पात्रता के अनुसार ही उनकी अनुकंपा और कृपा प्राप्त कर पाते हैं।

इसीलिए अपनी दयनीयता, बेबसी, शक्तिहीनता, अपयश और विफलताओं का दोष परमात्मा को देने से कहीं अच्छा है कि अपने अपरिश्रमी स्वभाव, अपनी अयोग्यता, अपात्रता, अपने निकम्मेपन, मूर्खता, अपने घमण्ड और नकारात्मक विचारों को दिया जाय।

याद रखिये की हम में से हर कोई साधारण से असाधारण, नर से नारायण होने की संभावना रखता है। यहाँ अनेकोंनेक ऐसे उदाहरण है जिन्होंने शून्य से यात्रा प्रारम्भ की और फिर शिखर तक जा पहुंचे। उन्हें परमात्मा ने कोई अलग से शक्ति नहीं दी थी ये सब करने के लिए। परन्तु वे सब प्रत्येक क्षण अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के प्रयास में सतत लगे रहते हैं, अपनी पात्रता – योग्यता की वृद्धि में लगे रहते हैं, अपनी श्रेष्ठता और अपने कौशल को बढ़ाने में लगे रहते हैं, अपने आने अनुसार शुभ कर्मों में संलग्न रहते हैं।

इसीलिये मुझे लगता है कि अपनी अज्ञानता, अविवेक और अन्य दुर्बलताओं पर ध्यान देना, उनसे पीछा छुड़ा लेना एक प्रार्थना है। अपने ह्रदय को पवित्र और अपनी मनोभूमि को पावन बनाये रखना प्रार्थना है। अपने स्वभाव, जीवनशैली, दिनचर्या और आदतों में निरन्तर सुधार करते रहना एक प्रार्थना है। प्रतिपल सात्विक प्रवृत्तियों का संग्रह करते रहना और अपने प्रथम कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने जीवन का उन्नयन, उत्कर्ष करते रहना ही प्रार्थना है।

मैं अपने आराध्य प्रभु से आज एक प्रार्थना तो ये करता हूं कि वे आपके सामर्थ्य, शक्ति, उत्साह, उमंग, हौसला, योग्यता, पात्रता, श्रेष्ठता और कौशल में तेजी से वृद्धि करवा दें तथा दूसरी ये कि वे आपके ऊपर आपकी योग्यता-पात्रता से बहुत अधिक कृपा करें जिससे आपकी प्रचुरता, विपुलता और शोभा में तेजी से वृद्धि हो पाये।

आप को शतायु, स्वस्थ और सानन्द जीवन के लिये ढेर सारी मंगल शुभकामनाएं 💐

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।

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