रामनवमी का पर्व अपने भीतर के रामतत्व को जगाने के लिये है

सुप्रभात दोस्तों। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम, जो सारे संसार की आत्मा हैं, जिनका त्याग, संयम, चरित्र और जिनका पूरा दिव्य जीवन हम सभी के लिए आदर्श है, जो भारतीय संस्कृति के सर्वोच्च आदर्श हैं, उनके प्रकटोत्सव के इस पावन अवसर पर आप सभी को ढेरों बधाइयां।

श्री राम जैसी मर्यादा, सौंदर्य, उदारता और शिष्टाचार का दूसरा उदाहरण इस संसार मे भला कहाँ मिलेगा? इसीलिये मेरा मानना है कि आज का ये उत्सव, पर्व, त्यौहार अपने भीतर के रामतत्व को जगाने का है। अपने भीतर के रामतत्व को जगाने से मेरा मतलब है अपने जीवन में सात्विक प्रवर्तियों और अच्छे संस्कारों को उदय होने देने से है।

आज परमेश्वर के चरणों में बैठ कर अपने अंत:करण को मलिन बनाने वाली अहंकार, स्वार्थ तथा संकीर्णता की सब क्षुद्र भावनाओं से उँचे उठ कर, सत्यनिष्ठा, मर्यादा और धर्म का पालन करते हुए अपने कर्त्तव्य पथ पर सतत अग्रसर रहेंगे ऐसा निश्चय करें, संकल्प करें और इस प्रयास में जुट जायें जिससे आप भी अपने सेवा भाव, विनम्रता, सहजता, सरलता, श्रेष्ठता, सत्कर्म प्रीति और शुभ कर्मों के कारण अनन्त काल तक स्मरणीय और वन्दनीय बन जायें।

हम सभी के जीवन में शुभ संयोगों, खुशियों और सौभाग्य में निरंतर वृद्धि की कामना के साथ एक बार पुनः सभी को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनायें 🙏

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी ।
हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप बिचारी ॥

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