रविवारीय प्रार्थना – स्वयं को खंगालना और आत्म-सुधार का निरन्तर प्रयास करना।

शुभ रविवार। सबका भला सर्बत्त का भला 🙏

एक बात तो ये की – स्थिरता, शीतलता, हार्दिकता, सज्जनता, श्रेष्ठता और देवत्व – ये गुण किसी भी प्रशिक्षण, शिक्षा, उपदेश या सलाह से परे हैं। यदि ये स्वभाव में विद्यमान हैं तो स्वतः प्रकट होते हैं, अन्यथा नहीं।

दूसरा ये की – अपनी जात यानि मूल स्वभाव… अपना धर्म मतलब सहज कर्म… ये  दोनों किसी को बताने की बात नही है.. आचरण से, व्यवहार से और दैनिक कार्यों से प्रकट हो ही जाते हैं। चाहे हम कितना ही दिखाने या छिपाने का प्रयास करें, हमारे असली गुण अवश्य ही सामने आ जाते हैं।

मेरा विश्वास है कि आप इन दोनों बातों को, सनातन सत्यों को पहले से ही जानते और मानते हैं। मैंने बस आदतन एक बार फिर आपको याद दिला दिया 🤭

मेरा मानना है कि हमारा मन, कर्म और चिंतन ही हमारे इहलौकिक-पारलौकिक अनुकूलताओं या इष्ट प्रतिकूलता के लिए जिम्मेदार है, अन्य कोई नहीं। इसीलिए, अपने कर्मों, भावों, आचरण और विचारों की निरंतर समीक्षा करना ही वास्तविक प्रार्थना है।

स्वयं को निरंतर खंगालना, अपनी गलतियों को सहजता से स्वीकार करना, उनसे सीखकर हर रोज खुद को बदलने के लिए प्रेरित करना और प्रयास करना प्रार्थना है। जो भी आपके अनुसार आपके आराध्य देव की दृष्टि में भला, सुग्राह्य, सही और सर्वोत्तम कार्य है उसे पूरी निष्ठा और लगन के साथ करते रहना ही प्रार्थना है।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि आपकी वाणी और व्यवहार से सदैव मीठा रस बरसता रहे। आप उनके द्वारा निर्देशित मार्ग पर चलते हुए कई नई ऊंचाइयों को छुएं और अपनी आत्मिक शक्ति और दैवीय गुणों को तेजी से विकसित कर पाएं।

मैं आज उनसे ये भी प्रार्थना करता हूँ कि आपके प्रत्येक दिन में कोई ना कोई त्योहार हो, उत्सव हो, दावत हो और आपके घर-आंगन में सदा शुभता और मंगल्य की वर्षा होती रहे। आप को शतायु, स्वस्थ और सार्थक जीवन के लिए ढेरों ढेर मंगल शुभकामनाएं।

श्री राम दूताय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।

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