रविवारीय प्रार्थना – अपने हाथों से जन्मों से संचित पुण्य कर्मों के बल को इस जन्म में खत्म होने नही देना।

दोस्तों, यह सच है कि समझाने से लोग नहीं समझते, क्योंकि अगर समझ पाते तो बांसुरी बजाने वाले श्री कृष्ण कभी महाभारत नहीं होने देते 🤭। लेकिन फिर भी समझने और समझाने का प्रयास निरंतर जारी रखना चाहिए। इसी क्रम में मेरा ये एक छोटा सा प्रयास भी स्वीकार करें।

हम सब अपनी भौतिक संपत्ति – घर-परिवार, मान-सम्मान, धन-दौलत – का ध्यान रखते हैं। रखना भी चाहिये, यह ज़रूरी भी है। लेकिन क्या हम उस ब्रह्मांश, उस परमात्मा के बीज का ध्यान रखते हैं जो जन्म से ही हमारे अंदर छुपा है? जन्मजात रामतत्व को पोषित – विकसित न कर पाना अज्ञानता है, परंतु उसे अपने हाथों नष्ट करना तो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। पूर्व जन्मों के पुण्यों को गँवाना भी हानिकारक है। कोई बात नही की आप इस जन्म में पुण्य कर्मों के बल को अगले जन्म के लिये संचित नही कर पाते हैं, लेकिन ये क्या की पूर्व जन्मों में संचित अनंत पुण्य कर्मों के बल को भी इस जन्म में खत्म कर दें…. ये तो कोई समझदारी की बात नही हुई 🤔।

उम्मीद है ये बात आप को समझ आयी होगी 🤞

इसीलिये हर कदम संभल कर चलना, सावधानी से चलना ही प्रार्थना है। आप को परम् पद प्राप्त करना है या नही, मोक्ष प्राप्त करना है कि नही तथा आपको आध्यात्मिक उन्नति चाहिये कि नही इसका फैसला आप स्वयं करें। आप को क्या करना है, क्या नही करना है यह आप के उपर ही निर्भर करता है। मेरा आज बस ये सुझाव है कि अपने हाथों से अपना शारीरिक, आर्थिक, मानसिक और आध्यात्मिक नुकसान न होने दें, जो भगवदीय क्षमताएं तथा सम्भावनाएं मौजूद हैं उन्हें नष्ट न होने दें।

क्योंकि यह नुकसान केवल हमारा और हमारे परिवार का ही नहीं होगा, बल्कि पूरे अस्तित्व का होगा। अज्ञानता के कारण जमा हो गये छिछोरेपन, नीचता, पाखण्ड और क्षुद्रता का त्याग करते रहना तथा अपने चिन्तन, चरित्र और प्रयासों को ऊँचा उठाते चले जाना प्रार्थना है।

आज मेरे आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना है कि आप निरंतर शुभ कर्म करते हुए, अपने रामतत्व का पोषण करते हुए, आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित रहते हुए और अपने आराध्य की कृपा में विश्वास रखते हुए शीघ्र ही अपनी अनंत शक्ति, शाश्वत आनंद और अपनी दिव्य सम्भावनाओं को जल्द ही पूर्णतः साकार कर लें। 

उनसे ये भी प्रार्थना है कि आप स्वस्थ रहें, प्रसन्नचित्त रहें तथा आपकी अंतर्यात्रा और आगे की जीवन यात्रा सार्थक, सुंदर, सरल एवं सुगम हो जाये। 

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।

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