रविवारीय प्रार्थना – मन सदैव स्थिर रहै और तन हमेशा गतिमान रहे।

क्या आपने कभी गौर किया है कि हमारा मन कैसे परस्पर विरोधी विचारों में उलझा ही रहता है? मन कभी दृश्य की ओर, तो कभी अदृश्य की ओर भागता रहता है, जिससे यह हर पल गहन तनाव में होता है। यह दो ऐसी चीजों को जोड़ने का प्रयास करता रहता है जो जोड़ी ही नहीं जा सकतीं, और यही तनाव और चिंता का कारण बनता है। हम हर क्षण इसी चिंता में जीते हैं।

मन को स्थिर कैसे करें?

ये समझना ज़रूरी है कि मन स्थिर होता ही नहीं। वस्तुतः, अस्थिरता और चंचलता ही मन का स्वभाव है। इसलिए मन या तो होता है, या नहीं होता है। मन या अमन – बस ऐसी ही दो स्थितियां हैं।

तो क्या करें?

कुछ भी नहीं! बस जागें, देखें सारी बातें। अपने मन को देखें। मन के प्रति होशपूर्ण हो जाये। धीरे-धीरे मन गलने लगता है, पिघलता है और आखिर में मिट जाता है।

अधूरे और पूरे आदमी में बस यही अंतर है

याद रखें, अधूरे आदमी के पास बस केवल मन ही होता है। असल में, उसके पास मन के अलावा कुछ भी नहीं होता। पूरे आदमी के पास मन नहीं होता, उसके पास संकल्प होता है। भगवान राम या बुद्ध के पास मन नहीं होता है। क्या आपने कभी सुना है कि उनका इस चीज़ का मन कर रहा है? या ये मन कर रहा कि ऐसा हो जाये? और जहां मन नहीं होता, वहीं आत्मा के दर्शन, बस वहीं परमात्मा की झलक मिलनी शुरू होती है।

इस पर अमल करने में थोड़ी अड़चन जरूर होगी, क्योंकि मन इतनी आसानी से आपको उसे स्थिर या खत्म नहीं करने देगा। लेकिन आपको अपने दृढ़ निश्चय से इस पर अमल करना होगा, इसे स्थिर करना होगा, खत्म करना होगा। यही सतत प्रयास और समझ ही एक प्रकार की हमारी प्रार्थना है।

लोग अक्सर प्रार्थना से कोई बड़े लाभ की अपेक्षा करते हैं। आपका और मेरी प्रार्थनाओं का मकसद कोई हमारे महान वेद पुराण या तंत्र ज्ञान को प्राप्त करना या बकुण्ठ का अधिकारी बनना नही है। यह तो बस अपने जीवन को पुष्पित करना है और अपने संसार को सुंदर बनाना है। मन को साध लेना है। मन को स्थिर कर वर्तमान क्षण से जुड़ कर जाग्रत अवस्था में जीना शुरू करना है।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना करता हूँ कि आपका मन सदैव स्थिर रहे (क्योंकि बिल्कुल खत्म तो होने से रहा🤭) और तन हमेशा गतिमान रहे। क्षण प्रतिक्षण आपका अहोभाव बढ़ता चला जाये, आप दिन प्रतिदिन सहज, सरल, विनम्र, सुंदर, सौम्य और मृदभाषी होते चले जायें। 

मेरी उनसे आज ये भी प्रार्थना है की आपके सभी शुभ संकल्प तथा मंगल कार्य सदैव सफल हों और आपके घर-आंगन में सदैव शुभता और मांगल्य की वर्षा होती रहे।

आप को शतायु, स्वस्थ और सशक्त जीवन के लिये ढेरों ढेर मंगल शुभकामनाएं 🙏

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।

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