रविवारीय प्रार्थना – जो भी कहें, सुने, या करें, उसमें परमात्मा की तरफ आपका बहाव हो, उसमें परमात्मा का स्मरण हो।

कल अयोध्या के पावन धाम में विचरण करते हुए एक महत्वपूर्ण विचार मन में आया की किसी तीर्थ स्थान में आना, ईश्वर की पूजा प्रार्थना करना, दान धर्म करना कोई बाध्यता नही है, बल्कि हमारे जीवन का एक स्वाभाविक, अनिवार्य और अभिन्न हिस्सा है। यह एक सहज अनुभूति है, आनंद का प्रवाह और अनुभव है।

यह संसार और इस समस्त सृष्टि के साथ एकता का भी अनुभव है। वास्तव मे तो जब आप प्रकृति को या फिर प्रकृति में मौजूद किसी भी जीव या प्राकृतिक चीज को समर्पित भाव से उपलब्ध हो जाते हो तब आप ईश्वर को ही उपलब्ध हो जाते हो और उन्हें प्राप्त कर लेते हैं। ये यूं भी समझने की बात है कि हजारों हज़ार किलोमीटर से किसी महान तीर्थ क्षेत्र में आ कर भी आप उनके दर्शन नही कर पाते हैं या फिर आप मंदिर में पहुंच कर भगवान के सामने खड़े हो कर भी उन्हें महसूस नही कर रहे होते हैं, अपने मे ही लगे होते हैं। वंही कुछ लोगो की आंखों से झरने बह रहे होते हैं, उनके रोंगटे खड़े हो गये होते हैं – ऐसा लग रहा होता है कि मानो प्रभु के वास्तव में ही दर्शन हो गए हैं, उन्हें पा लिया है तथा उन्होंने भी हमें बुला कर अपने दर्शन दे कर हमारा जीवन धन्य कर दिया है।

इसीलिये मेरा मानना है कि आप जो करें, वह प्रार्थनापूर्ण हो; जो भी कहें, सुने, या करें, उसमें परमात्मा की तरफ आपका बहाव हो, उसमें परमात्मा का स्मरण हो। कुछ न भी कर रहे हों, तो उस खाली क्षण में भी परमात्मा की मौजूदगी हो। ऐसी सुरति से जब हम जीना शुरू कर देते हैं, तो एक न एक दिन परमात्मा के संपर्क में जरूर आ ही जाते हैं और परमात्मा प्राप्त हो ही जाते हैं।

आपका जो भी पथरीला (कठोर) हिस्सा है, वह जो भी व्यर्थ है, सांयोगिक है या की जो भी कूड़ा—कर्कट अब तक इकट्ठा कर लिया है, वह चाहे कितना भी पुराना हो, वह सब का सब आपके इस प्रार्थनाशील स्वभाव की धार उसे बहा देगी और केवल वही बचा रहेगा, जो आपकी वास्तविकता है, जो आपकी पवित्र आत्मा है। मेरे अनुसार अपने वास्तविक रूप को अपनी दिव्य आत्मा को पा लेना ही परमात्मा को पा लेना है।

आज मेरे आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना है कि हर परिस्थिति में अपने जीवन और उनके अस्तित्व के प्रति श्रद्धावान बने रहने में आपकी मदद करें जिससे आप वास्तव में उस अनन्त स्त्रोत से जुड़े रह सकें, परमात्मा से जुड़े रह सकें और आपके सुप्त पड़े हुऐ गुण एवं आपकी सोई हुई श्रेष्ठता, दिव्यता, उच्चता जागृत हो जाये जिससे आपके भीतर एक नया निखार, तेज प्रकाश और उच्च स्तरीय प्रफुल्लता आ जाये।

आप को शतायु, स्वस्थ और सशक्त जीवन के लिये मंगल शुभकामनाएं 💐

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।

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