Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
हम में से अधिकांश लोग जीवन के गहन अर्थ को और उसके मूल उद्देश्य को समझने के लिए संघर्ष करते रहते हैं। हम जैसे साधारण लोगों को तो ये भी समझ नही आता है कि सुबह उठ कर हमें क्या करना है और क्या नहीं? पाप और पुण्य क्या हैं? ईश्वर कहाँ हैं और उन्हें कैसे प्राप्त किया जा सकता है? हम ही नही, बल्कि इन प्रश्नों ने सदियों से दार्शनिकों और धर्मगुरुओं को भी चिंतित कर रखा है।
दोस्तों, जीवन का मूल उद्देश्य क्या है ये वास्तव में तो एक सरल प्रश्न है, जिसका जवाब हर व्यक्ति के पास है लेकिन अपनी अपनी सुविधानुसार 🤭। लेकिन, अगर आप मुझ से पूछेंगे तो मैं इसे दो लाइनों में इस तरह बताऊंगा: जीवन का मूल उद्देश्य है अपनी क्षमताओं को पहचानना, अपने स्वधर्म को पहचाना, उनका सदुपयोग करना और अपने जीवन को सार्थक तथा इस दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने का सतत प्रयास करना है।
माना कि हम दुनिया मे कोई बड़ी क्रान्ति नही ला सकते हैं तथा ये भी माना कि हमारा जीवन विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक नही हो पायेगा। ये भी माना कि हम सिद्ध और प्रसिद्ध महापुरुषों की तरह नही बन पाते हैं, लेकिन ये क्या की हमारे विचार, हमारे वार्तालाप (स्वंय से और दूसरों से), हमारी सोच और व्यवहार हमे अपने सर्वोच्च को भी उपलब्ध नही होने देगी। ये भला कोई बात हुई 🤔?
साधरणतः जीवन पहले से बहुत सीमित व संकुचित है, इसे अपनी कुंठाओं, अपनी कमजोर बातें और निम्न स्तर के आचरण से और अधिक दोषयुक्त, अपूर्ण तथा असन्तोषजनक न बनाये। बड़े पुण्यकर्म भले ही करें न करें लेकिन अनैतिक और नीच कार्य करने से तो बच ही सकते हैं।
प्रियवर मेरा कहने का अर्थ है कि अगर आप अपनी अकड़ को, अहंकार को और मूर्खता को कम नही कर सकते हो तो कृपया इन्हें और अधिक पोषित न करें, बढायें नही।
इसीलिये मेरा मानना है कि विनम्र होना, सरल और सहज रहना परमात्मा की सबसे अच्छी प्रार्थना है। सच्ची निष्ठा, ईमानदारी व प्रेम से अपने कर्त्तव्यों का पालन करना प्रार्थना है। ईश्वर की बात करता है उनके गीत गाना, उनके होने की बात करना प्रार्थना है। हर हाल में आशा का दीपक जलाये रखना और दूसरों को निरन्तर दिखाना प्रार्थना है।
हमारी आत्मा शाश्वत है… और उसका नित्य पोषण सबसे बड़ा स्वधर्म है… अपनी आत्मा से परमात्मा की दिशा में जाना सनातन मार्ग है… इस मार्ग से हटना ही अधर्म है… हर परिस्थिति में बस ये समझ बनाये रखना तथा हर पल अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना और जो कुछ भी आप कर सकते हैं, वो करना ही सर्वोत्तम प्रार्थना है।
आज अपने आराध्य प्रभु से प्रार्थना करता हूँ की सद्गुण और सदविचार ग्राह्यता आपका स्वभाव बन जाये जिससे आपके जीवन में भी यश और श्रेष्ठतायें प्रवेश कर सकें।
आपका जीवन, जितनी अवधि तक भी है, वो न सिर्फ आपके लिये बल्कि सभी के लिये आनंद और शांति का दिव्य स्त्रोत बना रहे, आप हमेशा स्वस्थ, शांत, मजबूत और संतुलित बने रहें, इन्ही सब कामनाओं के साथ साथ आज प्रभु जी से मेरी ये भी प्रार्थना है कि आपके चेहरे पर मुस्कान बनी रहे और आपके घर आँगन में खुशियों का वास सदा बना रहे। मंगल शुभकामनाएं।
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।
