Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
आज मैं आपसे एक बहुत ही गहरा सवाल पूछना चाहता हूं। किसको आपने अपने ह्रदय में स्थापित कर रखा है? किस परमात्मा की आप पूजा करते रहते हैं।
आमतौर पर हम मनुष्य किसी भी ऎसी चीज़ को ईश्वर मान लेते हैं जो हमें सुरक्षा, पहचान, खुशी और मनचाहा देती है, जो हमारा स्वार्थ सिद्ध करती है, अहंकार वृद्धि करती है और लोभ लालच की पूर्ति करती है। चाहे फिर वो कोई व्यक्ति हो, विचार हो या फिर कोई देवता। हम अपनी इच्छाओं और भयों के आधार पर ईश्वर की कल्पना करते हैं।
लेकिन क्या यह सच्चा ईश्वर है? क्या यह वही ईश्वर है जो हमारे वेदों में वर्णित है? या वो जो कबीर ने वर्णित किया है? जो सर्वव्यापी है? जो निर्गुण और निराकार है?
मेरा ये सब कहने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप ईश्वर रहित हैं, कि आप असल ईश्वर को नहीं जानते हैं या की आप उन की कृपा से वंचित हैं और मेरा ये भी मतलब नहीं है कि आप किसी से हीन या निकृष्ट हैं। मेरा मतलब केवल इतना है कि आपके जीवन का आधार या आके ईश्वर की अवधारणा केवल भय, लोभ, लालच, कपट, ईर्ष्या पर तो टिकी नही हो सकती है।
मुझे कोई बहुत ज्ञान तो है नही, लेकिन जितना अपने बड़ों से समझा, बड़े गुरुओं और सिद्ध जनों को पढ़ा सुना, तो ये तो समझ आता ही है कि ईश्वर कोई सत्ता नहीं है जो “जो होना है” उसे रोक दें – जो मृत्यु रोक दे, बीमारी रोक दे, गरीबी रोक दे, अपमान रोक दे, जो आपके लोभ लालच को पूरा कर दे या फिर की आपको श्रेष्ठ और दूसरों को निम्न बना दे। हम जैसे साधरण मनुष्यों के लिये ईश्वर एक सहज चेतना है… जो मात्र आपके होने का स्पन्दन है.. ईश्वर का मतलब है प्रेम, सत्य, चेतनता, शुभता, सहजता और इनसे उपजा आनंद।
आप को और मुझे समझना होगा कि – हम कैसे, क्या और कहाँ हैं, कँहा जायेंगे, क्या हासिल करेंगे… ये सब अपने बल, बुद्धि और विवेक की बात है तथा शुभ कर्मों से अच्छा भाग्य बनता है और अशुभ कर्मों से बुरा भाग्य बनता है।
इसीलिये मेरे लिये प्रार्थना का मतलब है की सारे सांसारिक, मानसिक और दैहिक प्रपंचों के बीच भी निरन्तर उनके वर्णित स्वरुप एवं सदगुणों का सतत चिंतन करना, उनके कहे गए वचनों और सद्गुणों को आत्मसात करने का प्रयास करना – उन्हें अपने भीतर विकसित करना। मेरे लिये प्रत्येक सत्कर्म, वैचारिक शुचिता, सद्भावनाओं और सत्प्रवृत्तियों से ओतप्रोत दैनिक जीवन ही प्रार्थना है।
मैं आज अपने आराध्य प्रभु जी से विनम्र निवेदन करता हूँ कि वे आपके विचार, भाव, इच्छायें, नियत और प्रार्थनाओं को बदलने में आपकी सहायता करें जिससे आपका दैनिक जीवन ही एक यज्ञ बन जाये और आप आनंद एवं अहोभाव से भरे रह कर सफलता पूर्वक आत्मा से परमात्मा होने की अपनी यात्रा पूर्ण कर सकें।
आप स्वस्थ रहें, प्रसन्नचित्त रहें तथा आपका अन्तःकरण सदा शुभ, धार्मिक – आध्यात्मिक बना रहे इन्ही सब मंगल कामनाओं के साथ नमस्कार 🙏 सुप्रभात 💐
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।
