रविवारीय प्रार्थना – सनातन सत्यों और मूल्यों पर अमल करना ही प्रार्थना है।

यह सच है कि आप जो मानते हैं वही मानते हैं और वही सदा मानेंगे भी। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि आप जो मानते हैं वह सच ही हो।

आप जो मानते हैं, वह सच हो भी सकता है और नहीं भी। लेकिन जो सच है, वह सदा सच ही रहेगा। जैसे कि सूर्य पूर्व में उदय होता है, पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है, ईश्वर एक है… और उस एक में ही सब समाहित है… आत्मा नश्वर है… आत्मा का पोषण ही स्वधर्म है… आत्मा से परमात्मा की दिशा में जाना ही सनातन मार्ग है… इस मार्ग से हटना ही अधर्म है… ये वो हैं जो सनातन एवं सार्वभौमिक सच हैं।

लेकिन हम अक्सर इन अत्यंत सहज, सरल और स्पष्ट सनातन सत्यों को नज़रअंदाज कर, अपने बनाए हुए झूठों को ही सच मानते रहते हैं। इसीलिये शायद कामनाओं और भय से भरा नकली जीवन जीते रहते हैं।

मेरा मानना है कि आप अपने जीवन में अगर वो नहीं कर पाते हैं जो आप कर ही नही सकते, वो नही जान पाते हैं जो आप समझ ही नही सकते हैं तो कोई असाधारण बात नही है। लेकिन अगर आप वो भी नहीं करते जो आप आसानी से कर सकते हैं, उन सत्यों को भी सच नही मान पाते हो जो आप जानते हैं समझते हैं तो आप निहायत ही मूर्ख, बुद्धिहीन, अधर्मी, नकली और चालबाज़ इंसान हैं। सनातन मूल्यों को समझते बुझते हुए भी उन्हें अपने जीवन में न उतार पाना, अमल ने न लेना अधर्म है।

अत : अपने हम अपने झूठे विश्वासों – अपने गढ़े गये सत्यों को मानने की बजाय जो सनातन एवं सार्वभौमिक सत्य हैं उन्हें मानने समझने की निरंतर कोशिश ही हमारी प्रार्थना होगी। याद रखिये की अपने अंतःकरण को पवित्र बनाए रखना, मन, वचन और कर्मों को शुद्ध रखना ही आध्यात्मिक उन्नति का सच्चा मार्ग है। शुभ कार्यों में संलग्न रहने से न केवल हम समाज के लिए उपयोगी बनते हैं, बल्कि हमारे भीतर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जो हमें अलौकिक अनुभवों की ओर अग्रसर करती है।

आज मैं आपके मानसिक विकारों, चिन्ताओं और संकटों से मुक्त सुखद, समृद्ध, यशस्वी, आनन्दमय स्वस्थ जीवन की कामना के साथ साथ अपने आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना करता हूँ कि आदिशक्ति माँ जगदम्बा की आराधना का ये पवित्र पर्व शारदीय नवरात्री आप के लिए मंगलमय साबित हो तथा उनकी कृपा प्राप्त करने की आपकी योग्यता और पात्रता को दिन प्रति दिन बढ़ाये। मंगल शुभकामनाएं 💐

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।

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