रविवारीय प्रार्थना – अपनी मनुष्यता का मूल्य और गौरव समझना और फिर उसी प्रकार के कार्यों द्वारा जीवन- निर्वाह करने का प्रयास करना।

चील आसमान की ऊंचाइयों पर उड़ती तो है, मगर उसकी नजर हमेशा नीचे कचरे के ढेर पर मरे हुऐ जानवरों पर टिकी रहती है। फिर आकाश का राजा होने का और इतनी ऊंचाई पर उड़ने का क्या फायदा, जब मन इन्ही चीजों पर नीचे ही लगा रहे? ये उदहारण हम सब के जीवन पर भी लागू होता है।

चील की तरह ही इतना सक्षम, बुद्धिमान, बेहद ताकतवर होने के बावजूद भी हमारा चित्त, दिल और दिमाग अक्सर कँहा लगा हुआ रहता है – बस वहीं कचरे के ढेर पर। शब्द पर नही भाव पर जाइयेगा 🙏🏼 

हमें इस असाधारण मनुष्य जीवन का इतना विराट आकाश मिला हुआ है, जिसमें हम ईश्वरत्व को प्राप्त कर सकते हैं, उनसे एकाकार हो सकते हैं, वो अर्जित कर सकते हैं, वो कर सकते हैं जो सदा सदा इस धरती पर रहे, जिसका कभी कोई अंत नहीं हो, लेकिन आत्महीनता, अज्ञान, अहंकार, व आत्म चिन्तन के अभाव में निम्न स्तरीय या नीच कार्य करते रहते हैं।

मैं अक्सर अपने रविवारीय लेख में वह कह रहा होता हूँ जो कि हमारे शास्त्रों की अंतर्निहित आत्मा है। मगर शास्त्रों के शब्द मैं उपयोग नहीं करता हूँ क्योंकि जो ईश्वर ने कहा था वो तो सिर्फ अर्जुन ही समझ सकते थे आप और मैं नहीं 🤭। इसीलिये नए शब्द, नए उदाहरणों का इस्तेमाल कर मैं वही सब दोहरा रहा होता हूँ जो मैंने पढ़ा है समझा है उन महान लोगों से जो उन शास्त्रों के जानकार हैं या थे। जो समझ सकते हैं, वे तो तत्क्षण पहचान लेते हैं कि मैं वही कह रहा हूं जो सदा कहा गया है जो नही समझते हैं उनका क्या ही हो सकता है। भाषा और शब्द भिन्न है, भाव और अर्थ भिन्न नहीं है।

इसीलिये उस चील की तरह नही बल्कि भीतर जो अम्रत कलश छुपा है, जो हमारे साधारण से लगने वाले जीवन में आदि जीवन की ईश्वरीय अंश की ऊर्जा छिपी है, उससे परिचित होने के लिये, अद्वितीय होने बनने के लिये प्रयासरत रहना ही प्रार्थना है। आपको अपनी मनुष्यता का मूल्य और गौरव समझ आना और फिर उसी प्रकार के कार्यों द्वारा जीवन- निर्वाह करने का, अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और अपना श्रेष्ठ संस्करण बनने का निरन्तर प्रयास करना और श्रम करना प्रार्थना है।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना करता हूँ कि आप के जीवन के सच्चे उद्देश्य जल्द ही उजागर हों और आप को वह दिव्य चेतना, ज्ञान, समझ, बोध प्राप्त हो जिसे पाते ही जीवन की दिव्यताएँ स्वतः प्रकट होने लगती हैं तथा जीवन एक अनोखी रौनक से भर जाता है।

आपका दिन शु़भ हो, आपका स्वास्थ्य उत्तम बना रहें, आपका घर आंगन खुशियों से महकता रहे, आप उत्साहित बने रहें तथा आपके सभी शुभ प्रयास सदैव सफल हों, आज  ये सब भी प्रभु के श्री चरणों मे मेरी प्रार्थना है। मंगल शुभकामनाएं 💐

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।

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