Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
मित्रों, क्या आपने कभी सोचा है कि इस विशाल ब्रह्मांड में, जहां अरबों तारे चमकते हैं, हमारी छोटी सी दुनिया में ही क्यों इतना संघर्ष है? क्यों कोई इतना अच्छा है और कोई बहुत बुरा, क्यों कोई आस्तिक है और कोई नास्तिक? क्यों कंही दिन है और कंही अंधेरी रात।
लेकिन क्या ये अच्छाई और बुराई सचमुच हैं? क्या ये रात और दिन वास्तव में हैं? या ये सब कुछ इस अस्तित्व और सांसारिक प्रक्रिया का हिस्सा है 🤔
असल मे मुझे लगता है कि हमारे भीतर एक ऐसा आकाश है, जहां अनेक तारे चमकते हैं। कुछ तारे उज्ज्वल, कुछ मंद, और कुछ अंधेरे में खोए हुए। ये तारे हमारे अपने विचार, भावनाएं, और अनुभव भी हैं। कभी-कभी, ये तारे आपस में टकराते हैं और एक अंधेरा छा जाता है। हम इस अंधेरे को बुराई कहते हैं। और जब ये तारे मिलकर एक उज्ज्वल प्रकाश पैदा करते हैं, तो हम उसे अच्छाई कहते हैं।
लेकिन असल मे इसमें कुछ भी अच्छा और बुरा नही है। असल में अगर वैज्ञानिकों की माने तो तारों का टकराव और परिवर्तन ब्रह्मांड के लिए एक सामान्य प्रक्रिया है और यही प्रक्रिया ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति, विकास और भविष्य को बनाये हुए है, इस अस्तित्व को बनाये हुए है जिसका आप और मैं छोटा सा हिस्सा हैं।
इसीलिए हमें तो जो हो रहा है जो घट रहा है बगैर उसका मूल्यांकन किये, तटस्थ रहना है। उसे घटते देना है। उसे रोकना नहीं है (रोक आप सकते ही नही हैं 🤭), देखना है और अपनी मस्ती में रहना है। कर्ता नहीं, द्रष्टा बनना है। क्योंकि तभी आप अपने भीतर चल रहे स्वयं का – स्वयं से संघर्ष से मुक्त हो सकते हैं।
या यूँ कहें कि ब्रह्मांड में होने वाली हर घटना की तरह, आकाश में तारों की तरह, हमारे जीवन में होने वाली अच्छाई और बुराई भी एक प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। हमें इन घटनाओं को लेकर नकारात्मक नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें तटस्थ भाव से देखना चाहिए और स्वयं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
इसीलिए इस दुनिया को कोसने की बजाये और बदलने की कोशिश के बजाये, स्वयं को सूक्ष्म रूप से जानना, जगाना, पाना और चमकाना प्रार्थना है। तटस्थ भाव को रखते हुए जो स्वयं से हो सकता है उसे करते रहना, अपनी भावनाओं, इच्छाओं, विचारों और गतिविधियों को सशक्त बनाते चले जाना कि आपका जीवन दिन प्रतिदिन शांत, सुंदर और अत्यधिक आनंदपूर्ण होता चला जाए, प्रार्थना है।
मैं आज अपने आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना करता हूँ कि आप को जल्द से जल्द ये सब यथार्थवादी दृष्टिकोण समझ आ जायें जिन्हें अपनाकर आप अपने वास्तविक स्वरूप को, अपने जीवन को अधिक से अधिक संतोषजनक और प्रामाणिक बनाते हुए स्वयं को श्रेष्ठता और सफलता के सुभग शिखरों पर प्रतिस्थापित कर पायें।
आप सदा स्वस्थ रहें, प्रसन्नचित्त रहें तथा आपका आने वाला प्रत्येक नया दिन शुभ हो, मंगलमय हो, इन्ही सब मंगल शुभकामनाओं के साथ आप सभी को एक बार पुनः प्यार भरा नमस्कार 🙏🏼
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।
