Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
मुझे पता है कि आपने जरूर कभी न कभी ऐसे व्यक्ति को देखा होगा जिसकी आँखें रात के अंधेरे को भी फीका कर देती होंगी? जिसका हास्य इतना गहरा होगा कि वह उदास दिलों को भी खुशी से भर देता होगा? जिसके मन की शांति इतनी गहरी होगी कि उसके आसपास का वातावरण भी शांत हो जाता होगा? वह इंसान जिसकी आंखों में कोई दिव्य चमक हो एवं झलक हो तथा उसके चेहरे की रूप रेखा में कोई दूर की खबर हो। आपने जरूर किसी ऐसे को पास से देखा होगा जिसे देखकर एक पल के लिये लगा होगा कि मनुष्य भी परमात्मा का अंश हो सकता है।
मुझे ये भी पक्का पता है की आपने जरूर ऐसे लोगों को भी देखा होगा जिनकी आँखों में क्रोध की आग जलती हो, जिनके मन में ईर्ष्या का विष फैला हुआ हो। जो दूसरों को नीचा दिखाने के लिए हर हद पार कर जाते हैं। वे लोग जो जीवन को एक कड़वा अनुभव बना देते हैं। जिनकी आंखों में नरक की लपटें जलती हो तथा जिनके चेहरे की आकृति, हाव भाव, सोच विचार उस सबका स्मरण दिलाती हो जो अशुभ है, कुरूप है तथा असुन्दर है।
सच मे जीवन की ये दो तस्वीरें हर जगह हर समय दिखाई पड़ती हैं। असल मे तो हर आदमी के भीतर शैतान होने की संभावना है, और परमात्मा की भी। हर आदमी के भीतर नरक की भी संभावना है और स्वर्ग की भी। हर आदमी के भीतर सौंदर्य के फूल भी खिल सकते है और कुरूपता के गंदे डबरे भी बन सकते है। प्रत्येक आदमी इन दो यात्राओं के बीच निरंतर डोल रहा है। ये दो छोर है, जिनमे से आदमी किसी को भी छू सकता है। और अधिक लोग अपने लोभ लालच की वजह से या अज्ञानतावश नरक के छोर को छू लेते है। और बहुत कम सौभाग्यशाली है, जो अपने भीतर के परमात्मा को उभार पाते है।
इसीलिए महत्वपूर्ण सवाल ये है कि जीवन जो इतना छोटा सा है, ऊर्जा जो सीमित है, बहुत सीमित है उसके साथ क्या करते हैं? क्या इतने कम समय में हम अपनी सांसारिक और दैनिक प्रतिबद्धताओं को पूरा करते हुए अपने भीतर परमात्मा को उभार पाने में सफल हो पाते हैं या नहीं? क्या हम कभी कोई ऐसी प्रतिमा बन सकेंगे या कोई ऐसी प्रतिमा बना सकेंगे जिसमे से परमात्मा की झलक मिल पाये?
ये कार्य अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। अतः तुच्छ और बेकार की, ईधर-उधर की बातों में उलझे बिना, अपने महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सतत प्रयासरत रहना ही हमारी सर्वोच्च प्रार्थना है। बस यही सार है आज के इस रविवारीय लेख का। उम्मीद है इस लेख का मूल भाव आपको समझ आएगा।
मैं आज अपने आराध्य प्रभु जी के चरणों में नतमस्तक होकर उनसे प्रार्थना करता हूं कि उनकी कृपा दृष्टि हम पर सदा ही बनी रहे। मैं उनसे प्रार्थना करता हूं कि उनके दिव्य गुण हमारे जीवन में प्रकट हों और हम उनके अंश स्वरूप बनकर उनके आदर्शों पर चल सकें। प्रभु के आशीर्वाद से हमारे सभी कार्य सफल हों और हम एक-दूसरे के लिए प्रेरणा का स्रोत बनें, ये भी आज मेरी उनसे प्राथना है।
आपकी उपस्थिति से हर जगह शांति, प्रसन्नता और उल्लास का वातावरण बने तथा आप सदा स्वस्थ रहें और आपका आने वाला प्रत्येक नया दिन शुभ हो, मंगलमय हो, इन्ही सब मंगल शुभकामनाओं के साथ आप सभी को एक बार पुनः प्यार भरा नमस्कार 🙏🏼
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।
