Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
क्या आप सोचते हो कि ईश्वर किसी पर कृपा करते हैं और किसी पर नहीं? क्या आप सोचते हो भगवत कृपा किसी को मिलती है और किसी को नहीं मिलती? भगवत कृपा तो बेशर्त सब पर बरसती है। उस तरफ से तो कोई भेद भाव नहीं है; लेकिन कोई उसे स्वीकार कर लेता है और कोई उसे इनकार कर देता है। बस यही फर्क है 🤫
इस बात को ऐसे समझते हैं कि वर्षा तो पत्थरों पर भी होती है और जमीन पर भी। इसी वर्षा से जमीन में तो बीज फूट जाते हैं, हरियाली आ जाती है लेकिन पत्थर वैसे के वैसे, रूखे के रुखे रह जाते हैं। पहाड़ पर वर्षा होती है, पहाड़ चूक जाते हैं क्योंकि पहाड़ खुद अपने से भरे हैं, उनकी बड़ी अस्मिता है, बड़ा अहंकार है। झीलें भर जाती हैं क्योंकि झीलें खाली हैं, शून्य हैं, उनके द्वार खुले हैं। झीलों ने स्वागत करने की कला सीखी, बंदनवार बांधे – और कहा आओ, स्वागत है….
ऐसी ही परमात्मा की कृपा भी अलग-अलग नहीं है। मुझ पर भी उतनी ही बरसती है जितनी आप पर। झीलें इस कृपा को अपने में समेट लेती हैं क्योंकि वे खाली हैं और स्वागत करने को तैयार रहती हैं। वो अहंकार वश इनकार में नही हैं। बस आज के रविवारीय लेख का मूल भाव और सार यही है की झीलों की तरह, जब हम ह्रदय के द्वार खोल कर दिव्य प्रकाश, उनकी अम्रत वर्षा को अंगीकार करने के लिये सज होने को आस्था कहते हैं और उसे ग्रहण करने को ही प्रार्थना कहते हैं। अपने भीतरी द्वार पर सतत दस्तक देते सूरज को – परमात्मा को “आओ, मैं स्वागत करता हूँ” कहने को ही श्रद्धा कहते हैं।
जीवन का परम सत्य यही है–कि हमारे किए कुछ भी नहीं होता है; जो होता है उसके किए ही होता है, उनकी अनुकम्पा और प्रसाद स्वरूप होता है। हम तो अगर इतना भी करने में सफल हो जाएं कि कोई अड़चन न डालें, तो बस बहुत होगा। वर्षा तो उनकी तरफ से होती है; हम अपने पात्र को उल्टा न रख, सीधा ही रख लें तो इतना ही बहुत होगा 🤭। यकीन मानिये वो लबालब भर जाएगा।
वास्तव में, इस सृष्टि में सब कुछ पूर्णता के साथ मौजूद है। यह एक संतुलित चक्र है, जिसमें हर चीज़ का अपना स्थान है। अब आप पर निर्भर करता है कि आप इस चक्र में कहाँ खड़े होना चाहते हैं और हर दिन क्या चुनते हैं। क्योंकि आप जो अहोभाव और ग्रहणशील मन से चुनते हैं वही आपको मिलता है।
यही सब बातें सब ने ही कहि हैं अपने अपने दौर में अपने अपने तरीकों से। मैं भी उसी कोशिश को उन्ही शब्दों को दोहरा रहा हूँ अपने तरीके से।
आज मैं अपने आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना करता हूँ कि आपकी असीम कृपा की वर्षा जो हम पर निरंतर हो रही है हमें उस कृपा को पहचानने और उसे अपने जीवन में उतारने की – ग्रहण करने की बुद्धि और शक्ति प्रदान करें। आपकी कृपा से हमारा हृदय सद्गुणों से भर जाए और हम इस संसार में जो भी मूल्यवान है, सुंदर है, श्रेष्ठ है, जो भी शुभ है उसे प्राप्त कर सकें।
प्रभु आपको और आपके परिवार को हमेशा सुरक्षित, स्वस्थ एवं प्रसन्नचित रखें। इन्ही सब मंगल शुभकामनाओं के साथ आप सभी को एक बार पुनः प्यार भरा नमस्कार 🙏🏼
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।
