रविवारीय प्रार्थना – आपकी गागर  हमेशा भरी रहे, सुरक्षित रहे और कभी भी फूटे नही। धीरे धीरे ये मिट्टी से अविनाशी सोने की होती चली जाये।

हम सभी ईश्वर की खोज, उनकी प्राप्ति और दर्शन की बात तो निश्चित ही करते रहते हैं, लेकिन अक्सर हम उनके दिए उपदेशों और निर्देशों को मानने में चूक जाते हैं। यह बहुत ही चिंताजनक है।

ईश्वर के वचनों या धार्मिक ग्रंथों को एक तरफ रखें, केवल अपने आस पास या एक पीढ़ी पीछे के महान लोगों, बुद्धिमान और ज्ञानियों के विचार और व्यवहार को ही समझ लें और उन्हें फॉलो करने लगें तो भी तो भी काफी होगा।  यह हम जैसे साधारण लोगों के लिये सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

हर एक मनुष्य के पास एक गागर ( मिट्टी का घड़ा) है, बस किसी की वो हमेशा सुरक्षित रहती है, भरी रहती है और बाकी की टूट जाती है, फुट जाती है और मिट्टी में मिल जाती है जैसे के कभी कुछ था ही नही।

असल में तो आप नृत्य में, प्रेम में, संगीत में, चित्रकला में, पाककला में, लेखन में, बातचीत में, कार्य में, असल मे तो हर क्षेत्र में इतना कुछ कर सकते हो कि आपकी गागर हमेशा ही छलकती रहे। अगर परमात्मा की अत्यन्त दुर्लभ, श्रेष्ठ और महनीय कृति होने के बावजूद हम सिर्फ इतना ही कर पाते हैं जितना की अन्य 83999 योनियों में जन्में जीव जानवर करते हैं, तो फिर सच मानिये की हमने इस अद्भुत मानवीय जीवन को व्यर्थ गवा दिया – अपनी श्रेष्ठ सम्भावनाओं को धूमिल कर दिया।

इसीलिए महान विचारों को आत्मसात करना, अपने अंतर्निहित शुभ प्रवृत्तियों को जागृत करना, अपने अंतस् को सदा शुभ संकल्पों से भावित रखना, श्रेष्ठ मार्ग पर चलना और हर परिस्थिति में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना ही आपकी गागर को न सिर्फ भरता जाता है बल्कि उसे धीरे धीरे मिट्टी से सोने की – अमर और अविनाशी बनाता चला जाता है। बस यही समझ और प्रयास हमारी प्रार्थना है।

केवल पाखण्ड नही करना है, दिखावा नही करना है, सच में कुछ करना है, कुछ महान करना है। महान बनने से मेरा मतलब उस असाधरण होने की, विशिष्ट होने की, बड़ा होने की, दूसरे को नीचा दिखाने या धोका देकर आगे निकलने की होड़ में शामिल होकर कुछ भी अच्छा या बुरा कर के भरण पोषण करने से नही है, बल्कि अपने वैचारिक-ज्ञान संपन्नता, प्रयत्न, पुरुषार्थ एवं सरलतापूर्वक साधारण से साधारण काम को भी महान कृति बनाने से है।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना करता हूँ कि आपकी ऊर्जा, सोच, विचार, रहन सहन, व्यक्तित्व और कर्म न केवल आपके अपने व्यक्तिगत जीवन में सुख, शांति और सम्मान का कारण बने बल्कि अपने परिवार एवं समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन लाये और इस दुनिया को एक बेहतर और सुंदर जगह बनाये।

आपके घर-परिवार में सुख-शांति आवे, आप सतत प्रगति करें तथा आपका स्वास्थ्य अच्छा रहे और दिन प्रतिदिन आपके ऐश्वर्य, दिव्यता और श्रेष्ठता में बढ़ोतरी हो, इन्ही मंगलकनाओं के साथ आपको प्यार भरा नमस्कार है 🙏

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।

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