रविवारीय प्रार्थना – अपने भीतर के रामत्त्व की पहचान करनी और थोड़ा सा अंदर की ओर मुड़ना।

आज मैं आपको एक बार पुनः ये याद दिलाना चाहता हूं कि बुद्ध पहले से ही आपके अंदर सांस ले रहे हैं। सत्य, ज्ञानस्वरूप, अनंत, ज्योतिर्मय परमात्मा का एक अंश हम सब के अंदर ही है। जो हम सब का सच्चा एवं शाश्वत स्वरूप है। बस थोड़ी सी इसकी पहचान करनी है, बस थोड़ा सा अंदर की ओर मुड़ना है… और बस हो गया 🤫

हमारे इस भौतिक जीवन मे यदि कोई एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक घटना घट सकती है, जो जरूरी भी है तो वो यही है कि हमें हल्का ही सही पर अपने अंदर के इस रामत्त्व का थोड़ा बहुत ज्ञान हो जाये। क्योंकि अगर आपको अपने भीतर के इस ब्रह्मत्व का ज्ञान हो गया तो आप उसके प्रति श्रद्धालु एवं आस्थावान हो जायेंगे और फिर अन्य अनित्य वस्तुओं के लोभ लालच में में उस का अपमान अथवा अवहेलना नही होगी।

और यह जबरदस्ती नहीं करना है। अगर आप इसे जबरदस्ती करेंगे तो आप असली लाभ से चूक जाएंगे। यह बहुत नाजुक प्रक्रिया है। आपको गंभीरता से नहीं, बल्कि खेल-खेल में अंदर की ओर देखना है।

इसीलिये ‘प्रार्थना’ अपने भीतर के समुंदर में प्रेम से गोता लगाना है। उस अभ्यास का नाम है जिसके द्वारा अपनी सांसारिक प्रतिबद्धताओं को उत्साह से पूरा करते हुए भी अपनी आत्मा की अजर-अमर ज्योति पर केंद्रित हुआ जा सकता है, उसे अपने दैनिक जीवन का एक अंग बनाया जा सकता है जिससे हम अपने मानवीय स्वभाव और मर्यादा में रह कर अधर्म व अनैतिक क्रियाकलापों से दूर रह सकते हैं तथा अपने भौतिक और आध्यात्मिक जीवन में संतुलन बना सकते हैं।

लेकिन इस अंदर के ज्ञान से या प्रार्थना से आपकी जीवन की भौतिक मुश्किलें, कठिनाइयाँ या तकलीफें खत्म नही होंगी और न ही ये आध्यात्मिक यात्रा का मूल उद्देश्य है। वे सब हमारे पूर्व कर्मों के या इस बार के कर्म फलस्वरूप हैं और उन्हें केवल अपने सत्कर्मो द्वारा ही कम किया जा सकता है, किसी आध्यात्मिक साधना या प्रार्थना से नही। लेकिन जो भाग्यवान परिश्रम, पुरुषार्थ करते हुऐ इस आध्यात्मिक- आत्मिक प्रयास, अभ्यास को भी अपना लक्ष्य बना लेते हैं उन्हें निश्चित ही आनंदपूर्ण जीवन जीना आ जाता है। उन्हें प्रतिकूलताओं में भी सहज रहना आ जाता है।

ये रविवारीय लेख एक प्रयास है स्वयं का और आपका ध्यान उस तत्वज्ञान पर लाना, जिसके आधार पर हम शाश्वत सुख और परमानंद के अधिकारी बन कर अत्यधिक सफल एवं सार्थक हो सकते हैं, भगवद कृपा एवं अनुभव के पात्र बन सकते हैं। उम्मीद है ये प्रयास आपको पसंद आ रहा होगा और आपकी कुछ सहायता भी कर रहा होगा। मुझे तो इसका बहुत लाभ हो रहा है।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना करता हूँ कि उनके आशीर्वाद एवं आपके इस चिन्तन, मनन तथा नित्य किये गए सत्कर्मों, शुभ कर्मों के पुण्य_संचय के फलस्वरूप आप न केवल अनंत काल तक धरती पर सुखों का उपभोग करें बल्कि आपके आगामी सभी जीवन भी सुख-शान्ति एवं आनन्द-उल्लास के साथ बीतें। इन्ही सब मंगलशुभकामनाओं के साथ आपको स्नेह भरा नमस्कार 💐

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।

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