Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
यह सोचना कि भगवान हैं या नहीं, या वे कहाँ मिलेंगे – ये सब वास्तव में तो फालतू की बातें हैं। असली सवाल तो यह है कि आप क्या हो? अत्यंत ही समझदार, लोमड़ी की तरह चालाक या निपट मूर्ख? बस यही एक सवाल है, बाकी सब बकवास। सच कहूँ तो, हमें भगवान चाहिए ही नहीं 🤔 और अगर मैं ये कहूँ की शायद हमें उन्हें ढूंढने से ज़्यादा, अनदेखा करने में मज़ा आता है, तो बहुत गलत नही होगा।
रविवार को मुझे आध्यात्मिक विषयों पर विचार करना – माथापच्ची करना और फिर आप सबके लिए मजेदार लेकिन असरदार और आसान तरीके से लिखना पसंद है। इसीलिए आज एक बार फिर वही पुरानी बातें एक नए अंदाज़ और शब्दों में पेश है:
हम और हमारा ‘स्मार्ट’ चुनाव
बात ये है कि हम सब खुद को बहुत स्मार्ट और चालाक समझते हैं। और जो लोग अधिक ‘स्मार्ट’ होते हैं, वे भगवान को कहाँ ही चुन पाते हैं? दुर्योधन याद है न 🤭? जब श्री कृष्ण खुद सामने खड़े हों, तब भी चालाक लोमड़ी जैसे लोग उनके चरण स्पर्श भी नही कर पाते हैं, उनका हाथ पकड़ने की तो बात ही छोड़ दो, प्रतिदिन इतना पूजा-पाठ करने का ढोंग करने वाले भी असल में उनका पूजा-वंदन कहाँ ही कर पाते हैं। सदियों से हम यह कहानी सुनते आ रहे हैं, और हर दिन वही गलती दोहराते रहते हैं।
आज भी तुम्हारा चुनाव क्या होगा, तुम जानते हो, जानते हो न 😉??
मैं आपको बता दूं, आपके अंदर बैठा दुर्योधन 2.0 आज भी आपको भगवान चुनने नहीं देगा। अगर श्री कृष्ण आज सामने आएं और कहें, “छोड़ो यह सारा पाखण्ड और नाटकबाजी। आओ गले लग जाओ, मुझे चुन लो।” तो भी मुझे नही लगता कि अर्जुन की तरह सब कुछ छोड़ कर उतनी सरलता से उन्हें चुन पाओगे? क्या वह सब मैन पाओगे, कर पाओगे – जो वे कहेंगे? बिल्कुल नही।
चलो अपने आज के मुख्य बिंदु पर आते हैं – अगर आज हमें भगवान मिल जाएँ, तो वे हमसे क्या कहेंगे? मुझे लगता है, उनका संदेश बहुत सीधा, पर हमारे लिए शायद बड़ा अजीब होगा। वे हमें किसी पुरानी किताब या कर्मकांड में नहीं उलझाएँगे, बल्कि कहेंगे: “अरे मूर्ख। मुझे कंहा ढूंढ रहे हो। क्यों इतना चिल्ला चिल्ली कर रहे हो। मैं तो तुम्हारी हर साँस में, तुम्हारी हर धड़कन में, उस हवा में जो तुम लेते हो, उस धूप में जो तुम्हें गर्माहट देती है, उस पानी में जो तुम्हारी प्यास बुझाता है, उन सब मे हूँ, जिनकी तुम परवाह भी नहीं करते। मैं हर उस इंसान में हूँ जिससे तुम मिलते हो, हर उस जीव में हूँ जिसे तुम देखते हो। मुझे बाहर मत खोजो, क्योंकि मैं तुम्हारे भीतर ही हूँ – तुम्हारा असली स्वरूप।
फिर वे आज के संदर्भ में भी शायद कुछ कहेंगे: असली बनो, दिखावा छोड़ो। रिश्तों में जान डालो, मोबाइल में नहीं। प्रकृति का ध्यान रखो। अपने काम को दिल से करो, उसे उत्सव बनाओ। पूरी ऊर्जा और क्षमता से जियो – हर पल को ऐसे जियो जैसे यही आखिरी है, और यही पहला भी। और शायद ये भी कहें कि अब इस सदी में आकर तो अपने अंदर के दुर्योधन को अपने भीतर से निकल ही दो। 😉
इसीलिए, मेरे हिसाब से, हमारी सर्वोच्च प्रार्थना यही होगी: ‘सबसे सक्रिय’, ‘सबसे वास्तविक’ और ‘सर्वोत्तम क्षमता’ वाला अर्जुन सा जीवन जीना – यही वह जीवन है जो ईश्वर हमसे जीने की उम्मीद करेंगे और जिसकी हम हमेशा से धज्जियाँ उड़ाते आ रहे हैं 🤪 ये समझना इतना मुश्किल भी नही है।
मैं आज अपने आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना करता हूँ कि आप अपने जीवन की सभी नर्संगिक चुनौतियों से जूझते हुए, अर्जुन की ही भांति अपने जीवन के अर्थ को खोजने, स्वीकार करने में सक्षम हो जायें और अपने धर्म एवं जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वाह कर श्रेष्ठ बनने के, श्रेष्ठ करने के और श्रेष्ठ पाने के इस अवसर का पूरा पूरा लाभ उठा पायें।
आप सदा स्वस्थ रहें, प्रसन्नचित्त रहें तथा आपका आने वाला प्रत्येक नया दिन शुभ हो, मंगलमय हो, इन्ही सब मंगल शुभकामनाओं के साथ आप सभी को प्यार भरा नमस्कार 🙏🏼
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।
