रविवारीय प्रार्थना – ईश्वर और स्वर्ग प्राप्त करने के योग्य बनने का निरंतर प्रयास।

आज फिर रविवार है, यानी वो दिन जब मैं आध्यात्मिक माथा-पच्ची करने की कोशिश करता हूँ और अपनी बुद्धि को रगड़ कर थोड़ा बहुत चमकाने की कोशिश करता हूँ 🙊

मुझे लगता है कि हम जैसे साधारण लोगों को नही पता कि ईश्वर का वास कहाँ है और स्वर्ग की प्राप्ति कैसे संभव है? कोई सही से बता भी नही रहा है 🤭 तो जो मेरी समझ में आया वो आपके साथ साझा कर रहा हूँ, उम्मीद है आपके काम आयेगा। आप भी अपनी रिसर्च कर लें 🙏

जितना मैंने समझा और महसूस किया उससे मुझे लगता है कि ईश्वर का अस्तित्व वहाँ है जहाँ सौंदर्य का अनुभव होता है, जहाँ शिष्टता एवं विनम्रता का सहज प्रवाह है, जहाँ प्रेम की निर्मल धारा बहती है, जहाँ सरलता और सहजता जीवन का आधार हैं, और जहाँ प्रत्येक क्षण को एक उत्सव के रूप में जिया जाता है। इसके विपरीत, जहाँ कलह क्लेश, चीख-पुकार, धक्का-मुक्की, नफरत की आग, मातम-पुर्सी का माहौल और दुर्गंध है, वहाँ ईश्वरीय उपस्थिति की कल्पना भी निरर्थक है। यह सत्य अत्यंत सरल है, फिर भी जाने क्यों कुछ की समझ से सदा परे रहता है 🤫

अब ज़रा इस स्वर्ग-नरक वाली ‘गुत्थी’ को समझते हैं 🤣 मुझे लगता है कि स्वर्ग या नरक कोई ऐसे स्थान नहीं हैं जहाँ हम मृत्यु के बाद पहुँचते हैं; वे इसी क्षण की संभावनाएँ हैं। अभी इसी पल कोई व्यक्ति नरक में हो सकता है या स्वर्ग में। आप नरक में हो सकते हैं और आपका पड़ोसी स्वर्ग में 🤭।

चलो एक पल के लिये अगर हम यह मान भी लें कि स्वर्ग और नरक इस लोक के बाहर कहीं हैं, तो भी वे इसी जीवन की एक कड़ी, एक शृंखला ही तो होंगे, इसी लोक का अगला कदम ही तो होंगे 🤔। यकीन मानिये की जैसे मंदिर हमारे घर का अगला कदम होता है, इसी तरह हमारा आध्यात्मिक जीवन हमारे सांसारिक जीवन का अगला कदम होता है।

अतः, यदि आप वर्तमान में सचेत, आनंदमय होकर अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं, वो कर रहे हैं जो आपको करना चाहिये  न कि जो नही करना चाहिये, तो आप निसंदेह स्वर्ग में हैं और आपका अगला कदम भी स्वर्ग में ही होगा। आपका बनाया स्वर्ग फैलता जायेगा। जिसका स्वर्ग अभी है, उसके दोनों तरफ स्वर्ग फैल जाता है। और जिसका स्वर्ग अभी नहीं है, उसके दोनों तरफ नर्क फैल जाता है। खेल सारा इस ‘वर्तमान पल’ का है। यही पल आपका ‘फ्यूचर’ डिसाइड करता है और शायद अगला लोक भी 🤫

बस यही समझ बनाए रखें कि सब कुछ आपके भीतर है – आज की श्रृंखला में कल निहित है प्रार्थना है। मृत्यु के उपरांत स्वर्ग प्राप्ति की चिंता करने की बजाये, प्रत्येक पल अपने परिवेश को स्वर्गिक बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहना प्रार्थना है। अत्यंत सावधानी से यह सुनिश्चित करना कि आपके द्वारा कोई ऐसा कार्य या व्यवहार गलती से भी न होने पाए जिससे कंही थोड़ा सा भी नरक का निर्माण होने की सम्भावना बने, प्रार्थना है। 

मैं आज अपने आराध्य प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि आपका जीवन निरंतर प्रस्फुटित हो, फले फुले और हंसी से, ख़ुशी से, गीतों से और नृत्य से भरता चला जाये, एक अविस्मरणीय आनंदोत्सव बन जाए और हाँ, अगर कहीं कोई परलोक है, तो आप उसमें स्वर्ग पाने के पूरे योग्य बनते चले जायें।

आपके सफल, सुखद, शुभ, मंगलमय और स्वस्थ दिनों की मंगल कामना के साथ आप सभी को एक बार पुनः प्यार भरा नमस्कार 🙏

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।

Leave a comment