रविवारीय प्रार्थना – स्वाभविक पाशविक प्रवृत्तियों से ऊपर उठकर अपने उच्चतम स्वरूप को पहचानना और उसे धारण करना।

हम सब जानते हैं कि अहंकार, लोभ और क्रोध बुरी चीजें हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि ये हमारे आदिम अस्तित्व का हिस्सा हैं। ये उस पाशविक प्रवृत्ति के निशान हैं, जो कभी हमारा स्वभाव थी। ये सहज हैं, स्वाभाविक हैं, लेकिन अब इनकी कोई ज़रूरत नहीं है।

इसीलिये यह सवाल नहीं है कि इन्हें कैसे मिटाना है, सवाल यह है कि इनके पार कैसे जाना है, अगर जाना है तो 🤭। असल मे तो सरलता, सहजता और विनम्रता को धारण करना पड़ता है, क्योंकि ये आपके मूल स्वभाव में नहीं थे और शायद अब भी नहीं हैं 🤫। ये सब हमेशा से एक चुनाव है, संघर्ष है, एक यात्रा है।

अगर आप अपने बिल्कुल निचतर स्तर पर ही रहना चाहते हो, तो आपकी मर्ज़ी। सानू की 🤣। लेकिन मैंने आपको श्रेस्ठ में रूपांतरित होने का एक आसन सा रास्ता दिखा दिया है।…अगर साहस है तो पशुता की जो पहचान अभी भी बाकी है उसे मिटा कर मनुष्य बन जाइये अगर देवता नही बन सकते तो 🙏…  बस जैसे ही आप की चेतना में ये रूपांतर होने वाली बात घर कर जाएगी, एक झटके में सब ठीक हो जाएगा… याद रखिये की मनुष्यता और देवत्व कोई विरासत नहीं है, बल्कि एक साधना है और उसे कोई भी कर सकता है। आप भी 💫

मुझे तो पता है, आपको पता है या नही मुझे मालूम नही 🙊 –  प्रभु कृपा को, श्रेष्ठता को एवं पात्रता को कोई खरीद नहीं सकता हैं, उसे कड़ी मेहनत से अर्जित करना पड़ता है।

मेरा मानना है कि ईश्वर आपकी इन खोखली पूजा-पाठों की बजाय, आपके भीतर मौजद ईश्वरत्व को धारण करने की बाट जोहते रहते हैं। वे सदा आपको भीतर से पूर्ण होने की अवस्था में आने की प्रतीक्षा करते रहते हैं। इसीलिये अपने पुराने मूल स्वभाव के दास न रहकर, अपनी चेतना को जाग्रत करने का प्रयास प्रार्थना है। अपने हर आचरण, हर व्यवहार, हर शब्द और हर कर्म को अपने उच्चतम मानवीय और दिव्य स्वरूप के अनुरूप ढालना ही असल में प्रार्थना है।

आज का यह रविवारीय लेख एक निमंत्रण है—अपनी पाशविक प्रवृत्तियों से ऊपर उठकर अपने उच्चतम स्वरूप को पहचानने और उसे धारण करने का, कुछ उत्कृष्ट करने का। आप इसे अपने भीतर की दिव्य पुकार का उत्तर देने के एक अवसर के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

मैं अपने आराध्य प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि आप श्रेष्ठ कर्म करने, श्रेष्ठ बनने और श्रेष्ठता प्राप्त करने का कोई मौका न चूकें। आप स्वस्थ, ऊर्जावान और प्रसन्न बने रहें। आपका हर नया दिन खुशियों भरा, शुभ और मंगलमय हो, जो आपको नई सफलताओं की ओर ले जाए। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, प्यार भरा नमस्कार 🙏

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।

Leave a comment