Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
रविवार को हम अक्सर जीवन के उच्चतर मूल्यों पर विचार करते हैं, उन सनातन सत्यों को समझने का प्रयास करते हैं जो सदियों से कहे जा रहे हैं। आज का ये प्रयास दीपावली के असली अर्थ को समझने का है।
कल मैं अपनी बिटिया के कार्यालय (MRAR) में पूजन के लिए गया था। वहाँ पूजा के थाल में जल रहे दीपकों में से एक की लौ मद्धिम थी। मैंने आसानी से हाथ से उस बाती को थोड़ा-सा आगे खींचा, और देखते ही देखते वह दीपक जी भर कर रोशनी देने लगा। उस एक क्षण में मुझे जीवन का एक बड़ा सत्य समझ आया: हमारे भीतर तेल (ऊर्जा), बाती (क्षमता), और दिया (शरीर)—सब मौजूद है। कमी सिर्फ इस बात की है कि हमने स्वयं या किसी दूसरे ने इस बाती को, हिम्मत के साथ, आगे की ओर कभी खींचा ही नहीं है 🤫
आज के इस रविवारीय लेख का यही उद्देश्य है। हम सदियों से ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ (अंधेरे से प्रकाश की ओर) की पुकार करते आए हैं। लेकिन आज मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि यह प्रार्थना किसी बाहरी शक्ति से नहीं, बल्कि स्वयं से किया गया एक कर्मठ आह्वान है। आपकी वह अतुलनीय दिव्य ज्योति जो जन्म से आपके भीतर प्रज्वलित है, वह कभी बुझती नहीं। वह सिर्फ आस-पास की धूल, निराशा, पाखंड और अज्ञान की परत से ढक गई है। यही कारण है कि उसकी लौ मद्धिम पड़ गई है। यह दीपावली, उस सुषुप्त चेतना को जगाने का, उस धूल को झाड़ने का, और अपनी भीतरी दिव्यता, सामर्थ्य और ज्योति को उसकी पूर्ण शक्ति पर लाने का सबसे अनुपम पर्व है।
इसीलिए, मेरा यह मानना है कि सच्ची प्रार्थना का एक अर्थ यह भी मानना होगा कि अपने भीतर के और अपने आस-पास के अंधकार को मिटाने का काम किसी और का नहीं, बल्कि आपका अपना है। इस युग को सतयुग में परिवर्तित करने की जिम्मेदारी आपकी है, किसी और की नहीं। मैंने अपना काम कर दिया, इस लेख ले माध्यम से आपकी बाती को आगे खैंच दिया है अब अपनी बाती को आगे खींच कर रखिये और चमत्कार देखिए 🤣
आज मैं अपने आराध्य प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि इस दीपोत्सव पर आपके भीतर से भी प्रकाश का उदय हो, जो आपको और आपके संपर्क में आने वाली हर चीज़ को प्रकाशित कर दे।
आपके श्री, यश, मान और कीर्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि हो। आपका शरीर स्वस्थ रहे और मन शांत रहे, इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ आपको दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ।
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।
