रविवारीय प्रार्थना – जीवन का अर्थ सिर्फ़ ‘गुज़रना’ नही है, बल्कि ‘कर गुज़रना’ है, ये समझ बनाये रखना।

मेरे लिए, रविवार आत्मावलोकन का दिन होता है। यह सप्ताह भर की घटनाओं (सुनी, पढ़ी, या अनुभव की गई बातों) पर गहन चिंतन करने का समय होता है। यह हर उस आंतरिक सवालों को सुनने का दिन है जो हर गुज़रते पल के साथ मेरे भीतर अधिक स्पष्ट (मुखर) होते जा रहे हैं।

हर दिन जो गुज़र रहा है, वो सिर्फ़ कैलेंडर नहीं बदल रहा। बल्कि अंदर एक बेचैनी, एक डर बढ़ा रहा है। यह डर किस बात का है? बस इस बात का कि एक दिन अचानक ऊपरवाला सामने आ गया, और फ़ाइल खोल कर मुस्कुराकर कर पूछ बैठा की  “क्या बस यही है?” तो क्या होगा 🤭

क्या यही है, वो ‘जीवन-गाथा’ जिसे रचने के लिए तुम्हें इतनी रचनात्मकता, इतने बहुमूल्य संसाधन और इतना अमूल्य समय दिया गया था? क्या यह किरदार है जिसे निभाने के लिए तुममें इतनी सब चमत्कारिक क्षमता भरी गई थी? उस पल, आप कहाँ खड़े होंगे 🤫?

ज़्यादातर लोग इस ग़लतफ़हमी में आँखें मूँदकर जी रहे हैं कि अगर वे उसे नहीं देख पा रहे, तो वो भी उन्हें नही देख पा रहा होगा और ‘सब ठीक ही होगा’ 🙊। वे भूल जाते हैं कि उनका जीवन एक लाइव ब्रॉडकास्ट है। इस ईश्वरीय कैमरे को अनदेखा करके जो बेपरवाही की ज़िंदगी जी जाती है, वो अंत में बहुत बड़ी विफलता बन जाती है।

जीना ही है, तो ज़रा हीरो की तरह जियो। ऐसे, कि अगर आज ही उनसे सामना हो जाए, तो सिर शर्म से झुका न हो, बल्कि नज़र से नज़र मिली हो। चेहरे पर हल्का-सा ‘विजयी भाव’ हो, और आप पूरे रौब से पलटकर कह सको— कहो प्रभु… कैसा लगा मेरा काम? मैंने कोई कसर तो नहीं छोड़ी न? आप बताओ… मेरी परफॉर्मेंस कैसी लगी 🤣? तब तो है मज़ा है अन्यथा सब कुछ बेकार।

याद रखिएगा कि जीवन का अर्थ सिर्फ़ ‘गुज़रना’ नहीं, बल्कि ‘कर गुज़रना’ है, यही समझ बनाये रखना शायद एक प्रकार की प्रार्थना है। तो उठो, क्योंकि कहानी अभी ख़त्म नहीं हुई है। हो सकता है आपने कुछ ग़लतियाँ की हों, बहुत से अवसर गँवा दिए हों, रिश्तों को ठीक से न सँभाला हो, या उनके आशीर्वाद और कृपा का सही उपयोग न किया हो। कोई बात नही है।

आने वाला प्रत्येक नया दिन आपको फिर से शुरू करने के लिए, बेहतर बनने के लिए और ख़ुद को साबित करने के ढेर सारे मौक़े देगा। मेरा विश्वास है कि यह सब पढ़ने के बाद, आप कोई भी अवसर अपने हाथ से जाने नहीं देंगे।

आज मेरे आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना है कि आपके जीवन में जो जो भी व्यर्थ है, वह अपने आप छूटता चला जाये तथा जो सार्थक है, वह बढ़ता चला जाये एवं गहरा होता चला जाये। आप स्वस्थ रहें, हंसते-मुस्कुराते, गाते-गुनगुनाते रहें तथा अपनी मस्ती में बने रहें। मंगल शुभकामनाएं।

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।

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