रविवारीय प्रार्थना: बीज रूपी मजे बहुत हुए 🙊, बीज से वृक्ष तक की यात्रा का साक्षी बने यह साल 🤞

लीजिए साहब, इस नए साल 2026 का पहला रविवार भी आ गया। नए साल के जश्न के लगभग सब गुब्बारे फूट चुके हैं, छुट्टियां बीत गईं और हम वापस अपने पुराने ढ़र्रे, अपने प्यारे से जीवन में लौट आए हैं। फिर वही सुबह, वही शाम, और वही हम। फिर वही पुराने बहाने, वही आपा धापी, लोभ लालच, पाखण्ड, गुस्सा, वही चूहा-बिल्ली की दौड़। सच तो यह है कि हमें इस सब की ऐसी लत है कि अगर कोई हमें जबरदस्ती स्वर्ग की शांति दे भी दे, तो हम घबरा जाएंगे, मना कर देंगे 🙊।

इसीलिए जो मजे ले रहे हो, लेते रहो। किसी बाबा या ज्ञानी की मत सुनना जो कहे की ‘यह गलत है’ या ‘वो सही है’.. या फिर की ये छोड़ दो, वो बदल दो। अगर हम यह सब नाटक बाजी और प्रपंच छोड़ देंगे, तो करेंगे क्या? जीवन काटने को दौड़ेगा। इसलिए जो भी सही गलत कर रहे हैं, बेधड़क करते रहिए। जब तक सांस है, इस सर्कस के पूरे पूरे मजे लीजिए 🕺।

बस एक छोटी सी शर्त है: थोड़े जागरूक (Aware) हो जाइए, ज़रा होश में आ जाइए।

आपको पता होना चाहिए कि आप कर क्या रहे हैं और क्यों। उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि आपको पता हो कि आपको असल में क्या करना है और क्या होना है। वो है – अपनी सतही पहचान, अपनी पशुता और अपने ‘बीज’ होने की अवस्था से थोड़ा ऊपर उठकर, खुद के ‘होने’ को—यानी अपने भीतर छिपे उस ‘परमांश’ को महसूस करना है और उसे प्रकट करना है। अपने बीज का खोल तोड़कर आसमान छूने वाला वृक्ष बनना ही जीवन का असल मकसद है। ये याद रखना और इस कोशिश में लगे रहना ही शायद प्रार्थना है।

पर कड़वा सच यह है कि आप खुद-ब-खुद अंकुरित नहीं हो सकते हैं और वो आसमान छूने वाला सुंदर और फलदार वृक्ष नही बन सकते हैं; आपको या तो घोर तपस्या करनी होगी, यानी के कड़ी मेहनत करनी होगी, स्वयं के खोल से संघर्ष करना होगा या किसी अनुभवी ‘माली’ की मदद लेनी होगी। जो भी मुनासिब हो, जो कर सकें, करें। केवल एक बंद बीज की तरह मिट्टी में खत्म नही हो जाना है।

मैं यहाँ आपको कोई बहुत बड़ा धार्मिक उपदेश नहीं दे रहा हूँ, बस यह दिखाने की समझाने की कोशिश कर रहा हूँ कि आप अभी कहाँ रुके हुए हैं। जैसे ही आप इस बात का मर्म समझ जाएंगे, आगे का रास्ता खुल जाएगा और वह आपको अंकुरित होने पर मजबूर कर देगा। बीज का वृक्ष होना एक नैसर्गिक प्रक्रिया है। जैसे ही आप होशपूर्वक बीज के खोल को तोड़ने की कोशिश शुरू करेंगे, विश्वास कीजिये पूरी कायनात, पूरा अस्तित्व आपकी हिम्मत बढ़ाने और आपकी मदद के लिए आगे आ जायेगा।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि उनकी असीम कृपा आप पर सदा बनी रहे। उनसे यही मंगलकामना है कि यह नया साल भी केवल बीज रूपी मजे लूटने में ही न बीत जाए, बल्कि यह आपके ‘बीज’ रूप के अंत और एक भव्य ‘वृक्ष’ के रूप में आपके खिलने का साक्षी बने।

आपका तन स्वस्थ रहे, मन प्रसन्न रहे, नियत साफ़ रहे और प्रभु में विश्वास बना रहे, इसी कामना के साथ मैं आज बल-बुद्धि के प्रत्यक्ष स्वरूप श्री हनुमान जी से प्रार्थना करता हूँ की ये नया साल आपके और परिवार में सभी के लिये असंख्य नये आशीर्वाद, अनंत शुभता और अखंड मांगल्य लेकर आए। मंगलशुभकामनाएँ 🙏

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।

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