Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
आज इस सुबह की राम राम 🙏 हाल ही में मैं एक ऐसे अनुभव से गुजरा जहाँ समय ठहर गया था—सर्जरी से पहले की रात, फिर वह मेज और एनेस्थेसिया का वह सन्नाटा। चूंकि अभी कुछ दिन पहले ही मैं इस से गुजरा हूँ, कुछ दिन अपने इस अनुभव के बारे में और लिखूंगा। इस उम्मीद में कि यह आपको अपना सा अनुभव लगने लगे और आपको कुछ सीखने का मौका मिले।
जब आपको पता है कि सुबह वह महत्वपूर्ण सर्जरी है, जब डॉक्टर आपको बेहोश करने की दवा देते हैं, तो वह क्षण बिल्कुल मृत्यु जैसा होता है। जब वह सघन बेहोशी आपको ढंकने लगती है, तब आपके हाथ से सब कुछ छीन लिया जाता है। आपकी सारी सत्ता, आपकी सारी बुद्धि, आपका अहंकार… सब वहीं मेज के बाहर रह जाते हैं। उस धुंधलके में आप कोई ‘नया विचार’ नहीं चुन सकते। आप यह नहीं कह सकते कि “रुको! आज मैं बुद्ध की तरह सोचूंगा” या 108 बार ‘राम राम’ या ‘हरे कृष्ण हरे कृष्ण’ कहने दो 🙊
उस घड़ी में, आपके पास सोचने का समय बिल्कुल नहीं होता है। आपके पास कोई चॉइस नहीं होती कि आप कोई सुंदर सा, आध्यात्मिक विचार ओढ़ लें, आप अपने किये गये कर्मो की माफी मांग लें, कहे गए सभी शब्दों की माफी मांग में। सब कुछ सुधार लें। एनेस्थेसिया के उस धुएँ में डूबते समय, आपके भीतर वही बचता है जो आपने असल में कमाया है, किया है, कहा है, सोचा है।
इसे बहुत गहराई से समझना… अक्सर लोग कहते हैं कि मरते वक्त दो चार बार ‘राम-राम’ कह लेंगे, ‘हरे कृष्ण हरे कृष्ण’ या ‘बुद्ध’ जैसे पवित्र विचार कर लेंगे, तो बेड़ा पार हो जाएगा। पर सच तो यह है कि उस सर्जरी वाली मेज पर, जब होश धीरे-धीरे छिन रहा होता है, आप वही होते हैं जो आप पिछले कई वर्षों से रहे हैं। आप बदल नही सकते हैं। अगर बदलना भी चाहें तो। उस आखिरी दबाव में आपके भीतर से वही रस निकलता है, जो आपने उम्र भर अपने भीतर भरा है। यदि स्वभाविक तौर से आप सरल रहे हैं, किसी का दिल नहीं दुखाया, छल-कपट से दूर रहे और अपनी विशिष्टता को पूरी श्रेष्ठता के साथ जिया है—तो उस अंधेरे में कोई डर नहीं आता।
यदि स्वभाविक तौर से धार्मिक हैं, भजन किया है, सरल रहे हैं, जानबूझकर लोगों का दिल नहीं दुखाया, अहंकार, पखण्डवश या ईर्ष्या वश कोई ‘मार-काट’ नहीं मचाई और जो कुछ भी किया अपनी श्रेष्ठता के अनुसार किया है—तो उस बेहोशी के अंधेरे में भी कोई डर नहीं आता सिवाय उस सर्जरी के, दर्द के या की बीमारी के। कोई कचरा आपके सामने खड़ा नहीं होता और न ही अगले जन्म का कोई भय सताता है।
उस सर्जरी की मेज पर, जब होश के आखिरी कतरे भी छिन रहे थे, तब मैंने जाना कि ‘गिल्ट-फ्री’ (पछतावे से मुक्त) होना कितनी बड़ी नियामत है। भले ही आपने बड़े-बड़े मंदिर न बनवाए हों, भले ही दुनिया की नज़रों में आप कोई ‘विजेता’ न रहे हों, पर अगर आपने कभी किसी डूबते हुए का हाथ थामा है, कुछ सूजी हुई आँख के आँसू पोंछे हैं, या अपनी शक्ति का इस्तेमाल किसी को गिराने के बजाय उठाने में किया है—तो वही आपका असली संचय है। मेरा मन शांत था, क्योंकि मैंने जीवन भर ज्यादातर सत्कर्म किए, शुभ शब्द लिखे और कहे। मन में कोई ‘खाऊँ-पाड़ो’ (लालच) भी नहीं रही; जो चाहा उसे जी लिया, जो मन में था उसे कह लिया, गा लिया, मना लिया। उस घड़ी में न कोई गिल्ट था, न पछतावे का शोर, और न ही स्वर्ग-नरक या अगले जन्म का कोई डर। वहाँ तो बस बुद्धत्व का मधुर संगीत बज रहा था, चेहरे पर एक सहज मुस्कान थी और एक गहरा यकीन था।
आज की रात जब आप सोएं, तो खुद को टटोलें। ✨ आँखें मूँदकर बस दो पल के लिए ठहरें। देखें कि भीतर से क्या निकल रहा है? रूह में अलौकिक हल्कापन है या किसी पुराने गिल्ट की कचोट? कोई हिसाब बाकी है, या आप इस पल में पूरी तरह मुक्त हैं?
याद रखना, आज रात की यह ‘छोटी नींद’ उस ‘महानिद्रा’ का रियाज है। अपने भीतर के कचरे को आज ही साफ कर लें। किसी को माफ कर दें, किसी से माफी मांग लें। जो हिसाब किताब कर सकते हो कर दें। खुद को इतना हल्का कर लें कि अगर यही नींद ‘अंतिम’ बन जाए, तो अगले जन्म की पहली किरण में सिर्फ प्रकाश, संगीत और ईश्वर हो। आपका आज का यह बीज कल महावृक्ष बन जाए—यही आपकी आज कि गयी असली प्रार्थना होगी। इसी सोच के साथ किये गए ज्यादतर कर्म, कहे गए शब्द स्वतः ही प्रार्थना हैं।
याद रखिये, जिसने जीवन भर बुद्ध बनने की ‘चेष्टा’ की है और उन कहानियों को जीने का प्रयास किया है जिन्हें वह रोज सुनता रहा; जिसने प्रभु के शब्दों को केवल सुना नहीं, बल्कि अपनी जीवन-प्रणाली बनाया है—वही, और केवल वही, उस अंतिम सन्नाटे में बुद्धत्व को या अपने आराध्य को याद रख पाएगा। और तभी वह उस बेहोशी के बाद एक गहरी शांति और अहोभाव (Gratitude) के साथ जागेगा 🤠 अन्यथा नहीं।
आप और आपका परिवार सदैव स्वस्थ, सुखी और मेरे आराध्य प्रभु – श्री हनुमानजी की कृपा की छत्रछाया में रहे। आपको सप्रेम सादर प्रणाम और अनेकों मंगलशुभकामनाएँ 🙏
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।
