रविवारीय प्रार्थना – उस ‘अति’ को देख पाना जो आपको परमात्मा से दूर रखे हुए है।

आपको एक बार पुनः सप्रेम सादर प्रणाम और अनेकों मंगलशुभकामनाएँ 🙏

आज इस रविवार कि सुबह एक भयंकर विचार मन में आया कि कहीं हम जो इतना कुछ कर रहे हैं, हजारों हजार चीजें रोज कर रहे हैं, इतना सब कह रहे हैं और जिस अनवरत प्रयास में सुबह से रात तक लगे हैं – वही हमारे और उस परमात्मा (यानी असली शांति और परमानंद) के बीच की दीवार तो नहीं बन गई है 🙈? कहीं वो ही हमारा सब करना – कहना तो हमारे दुख, तकलीफ और परेशानी का सबब नही बन रहा है।

हैरानी होती है कि इतनी अद्भुत प्रतिभा, तीक्ष्ण बुद्धि और सामाजिक ‘स्मार्टनेस’ होने के बावजूद, हम इतने गैर-जरूरी, पाखंड और खोखली बातों के जाल में ऐसे उलझ गये हैं जैसे कोई मकड़ी अपने ही बुने जाल में फंस गई हो। तटस्थ होकर देखेंगे तो पाएंगे कि हमारी लगभग 99% गतिविधियाँ (हो सकता है 100% 🫣) पूरी तरह निष्प्रयोजन हैं। यदि हम उन्हें न भी करते, तो न तो हमारी ज़िंदगी ही रुकती, न ही दुनिया का कोई बड़ा नुकसान होता और न ही इस अस्तित्व की लय बिगड़ती। ऐसा लगता है कि हम बस खुद को व्यस्त रखने के लिए या दिखावे के लिये ‘व्यर्थ’ का बोझ ढो रहे हैं।

सच्चाई यह है कि जीवन के गहरे अर्थ को समझने या परमात्मा के साथ एक होने के लिए हमें कुछ ‘जोड़ना’ नहीं है; बल्कि जो व्यर्थ ‘जुड़’ गया है, उसे घटाना है। इसीलिए मेरे अनुसार, उस “व्यर्थ” को उस “असार” को जिसने हमें हर तरफ से घेर रखा है, उसे पहचानना और उसे साहस के साथ छोड़ देना ही सबसे बड़ी प्रार्थना है।

आज मैं अपने आराध्य प्रभु के सम्मुख कोई लंबी-चौड़ी मांग नहीं रख रहा हूँ; मैं केवल उस ‘अंतर्दृष्टि’ के लिए प्रार्थना करता हूँ जो असली और नकली में भेद कर सके। हे प्रभु! हमें वह विवेक देना कि हम अनिवार्य और अनावश्यक, सत्य और असत्य के बीच का अंतर समझ सकें। हमें वह कान देना जो उस शोर को पहचान सकें जो केवल भटकाव है, और उस सूक्ष्म आवाज़ को सुन सकें जो शाश्वत सत्य है।

मेरी प्रार्थना है कि आपके जीवन में वही घटित हो, जिसका होना सच में मंगलकारी हो और जिससे आपके भीतर उनकी दिव्यता का अनुभव हो सकें। और ईश्वर करे, उसी आंतरिक प्रकाश से आप अपने संसार को भी थोड़ा बहुत आलोकित और प्रकाशित कर सकें।

आप और आपका परिवार सदैव स्वस्थ, सुखी और परम कृपालु श्री हनुमानजी की कृपा की छत्रछाया में रहे। मंगलशुभकामनाएं 💐

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।

Leave a comment