Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
मैं ये रविवार के लेख आपको और स्वयं को उन सरल सच्चाइयों की याद दिलाने के लिए लिखता हूँ, जो हमें जीवन के मूल सार से फिर से जोड़ती हैं। मुझे अक्सर लगता है कि जीव-विज्ञान, दर्शन, अध्यात्म और तर्कशास्त्र के सबसे बड़े रहस्य बहुत सरल होते हैं, बस हम उन्हें देख नहीं पाते हैं और समझ नहीं पाते हैं।
आज बात करते हैं ‘स्वीकार करने’ (स्वीकार्यता) के बारे में—जो न केवल अध्यात्म की नींव है, बल्कि तार्किक रूप से भी एक स्वस्थ और प्रभावी जीवन जीने का सबसे प्रभावी सूत्र है।
जब आप अपने कर्मों के फल को बिना किसी शिकायत के सहज स्वीकार कर लेते हैं, तो आप न तो दूसरों के दुखों का कारण बनते हैं और न ही कोई दूसरा आपके जीवन की उलझन का। यह ‘स्वीकार भाव’ ही वह जल है जो मन की सारी कालिख को धो देता है। इसके बाद कोई मलिनता या शिकायत शेष नहीं रहती, आप पूरी तरह निर्मल, निर्दोष और मुक्त हो जाते हैं।
जिस तरह रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) में हम किसी अशुद्ध पदार्थ को साफ करने के लिए सही विलायक (सॉल्वेंट) का उपयोग करते हैं, उसी तरह ‘स्वीकार भाव’ मन की सारी अशुद्धियों को धोने वाला वह आध्यात्मिक विलायक है।
यह समझना बहुत आवश्यक है कि आपके अनुभवों के लिए आपके अतिरिक्त और कोई उत्तरदायी नहीं है। इस रविवार की सबसे बड़ी उपलब्धि यही होगी कि आप स्वयं को थोड़ा और जिम्मेदार बनाने का प्रयास करें, जो भी कहें, करें – पूरे होश और जागरूकता के साथ कहें और करें और वर्तमान क्षण में पूरी तरह जीना शुरू करें। यही समझ और प्रयास वास्तव में प्रार्थना है।
मैं आज अपने आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना करता हूँ कि आपका यह स्वीकार भाव, अहोभाव और समर्पण का भाव— प्रभु, तेरी मर्जी में ही मेरी मर्जी है, उस ईश्वरत्व के लिए निमंत्रण साबित हो, और वह आपके जीवन और आपके घर-संसार में उतर आए—नाचता, गुनगुनाता, अनेकों महोत्सव लिए हुए।
आप और आपका परिवार सदैव स्वस्थ रहे, सुखी रहे और सदैव उनकी कृपा की शीतल छत्रछाया में सुरक्षित रहे। इन्हीं मंगल शुभकामनाओं के साथ आपको सप्रेम सादर प्रणाम। 🙏
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।
