प्रार्थना

आप जब अपनी युक्तियों, आशंकाओं, इच्छाओं, भ्रांतियों, उत्तेजनाओं तथा व्याकुलताओं को अपने आराध्य के चरणों मे रख कर कुछ भी कहते हैं तो वो प्रार्थना होती है। जब भी आप अहंकार, अज्ञान, स्वार्थ और लालच का आवरण हटा कर अपने असल सचिदानन्द रूप में आकर अपने भीतर के ईश्वरीय अंश को बाहर या भीतर कंही भी कीसी भी रूप में अनुभव करते हैं तो प्रार्थना होती है। अपने सभी कर्मो के फल स्वरूप प्राप्त परिणाम को ईश्वर की योजना का हिस्सा मानना ही प्रार्थना है। आप मे जो भी सामर्थ्य, ऊर्जा तथा शक्ति है उस से अपने जीवन की यथार्थता, आवश्यकता और उपयोगिता सिद्ध करना ही प्रार्थना है। ईश्वर से प्रार्थना है कि जल्द ही आपके सारे कष्ट, डर, संशय और अनिश्चिततायें खत्म हो जायें। आप के मान सम्मान और श्री में तेजी से वृद्धि हो, ऐसी मेरी कामना है। मंगल शुभकामनाएं। 💐💐

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