अपनी वास्तविकता के साथ पंक्तिबद्ध होना प्रार्थना है।

ईश्वर का एक मतलब है ब्रह्मांड में फैला हुआ विस्तार और उस विस्तार में छिपी सहजता, सरलता, सुंदरता, आनन्द और पूर्णता।

याद रखिये – इस सृष्टि की हर एक दिशा से ईश्वर किसी न किसी रूप में निरन्तर हमारी ओर ही आ रहे होते हैं, मगर हम उन्हें सुन नही पाते हैं, पहचान नही पाते हैं क्योंकि सृष्टि के सभी तत्वों में (स्वंय में भी) परमात्मा को देखने के लिये भाव चाहिए, चेतना चाहिए और अंतरात्मा की पवित्रता चाहिए।

इसलिये प्रार्थना कोई विधि या संस्कार नहीं है, कोई औपचारिकता नही है और न ही कोई अभिव्यक्ति है – वो तो एक पवित्र भाव है।

एक बात और – अपने भीतर झांकें….जो भी आपको दिखाई देता है, महसूस होता है, जो संगीत सुनाई देता है या मौन महसूस होता है, पूर्णता या कमी महसूस होती है, वही आपकी वास्तविकता है। और इस काल मे – आपके और मेरे लिये अपनी इसी वास्तविकता के साथ पंक्तिबद्ध होना ही प्रार्थना है।

आपको जो भी मिला है वह आपकी पात्रता के अनुसार परमात्मा का ही दिया है। इसलिए हर मायने में शुभ है। जो भी उन्होंने दिया है – अर्थपूर्ण है, सम्पूर्ण है। आपके जीवन का एक-एक क्षण बहुत ही महत्वपूर्ण है। आपका समय और कहीं नहीं, बस यह यहीं है – अभी है। इसीलिये आज और अभी के होकर, प्रत्येक क्षण ताजगी, जीवंतता और आनंद से जीना ही प्रार्थना है।

अपने मन और आत्मा को शांति, संतोष, संतुष्टि और आनंद से भर लेने तथा अपने आस-पास हर चीज और जीवात्मा में उनको यानी के पूर्णता को और खुशी को खोजने और महसूस करने के लिए अपने दिल – दिमाग को प्रशिक्षित करने का निरन्तर प्रयास ही असली प्रार्थना हैं। अपने इन प्रयासों में सदैव निष्ठा बनाये रखें।

मेरे आराध्य प्रभु से प्रार्थना है कि जल्द ही आप अधिक सजग, जाग्रत और सुसंगत हो जायें और प्रत्येक क्षण आपको आनन्द और पूर्णता का अनुभव होने लगे। मेरी उनसे ये भी प्रार्थना है कि आपका हर नया दिन आपके लिये कोई शुभ समाचार लाये, अच्छा स्वास्थ्य और भव्य सफलता लाये। मंगल शुभकामनाएं 💐

3 Comments on “अपनी वास्तविकता के साथ पंक्तिबद्ध होना प्रार्थना है।

  1. आपने प्रार्थना का सही अर्थ बहुत ही सहज शब्दों में व्यक्त किया ।🙏

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