बुद्ध की खोज आत्म-खोज है और बुद्ध का ज्ञान आत्मज्ञान है।

कल बुद्ध पूर्णिमा पर किसी ने ये बहुत सुंदर बात मुझसे साझा की – जिसे मैं आप तक पहुंचा रहा हूँ। जिस दिन आप यह जान लेंगे कि यहां स्वयं को जानने के अलावा कुछ भी जानना बेकार है, उस दिन से ही परम् के द्वार खुल जायेंगे, आनंद के द्वार खुल जायेंगे और आप सच मे भगवत्ता को उपलब्ध हो जाओगे।

बुद्ध का एक सुप्रसिद्ध सूत्र है – “अप्प दीपो भव”। अर्थात अपना दीपक आप बनो या अपने आप में एक प्रकाश बनो या अपने लिए प्रकाश बनो।

मगर हमारे दिव्य और महान प्रेरणा स्त्रोत मानते हैं कि आपको या मुझे अपना दीपक बनने के लिये कुछ करना नही है। वो आलोकिक लौ, दिव्य ज्योत और प्रकाश तो पहले से ही भीतर मौजूद हैं।

सवाल तो भीतर उतरने का है। जैसे ही हम अपने बाहरी आवरण को गिराकर, अपनी आंतरिक वास्तविकता को प्रकट करते हैं, रोशनी हो जाती है। दुर्गंध खत्म हो जाती है, चारों ओर सुगन्ध फैल जाती है। हम सब के बीज में ही एक प्रकाश है।

हम सब पहले से ही बुद्ध हैं। बुद्ध बनने, सीखने का या कुछ विशेष हासिल करने का सवाल नहीं है। यह केवल पहचानने का सवाल है – यह अपने भीतर जाने और जो कुछ है उसे देखने का सवाल है। बुद्ध की खोज आत्म-खोज है। लेकिन हम तो भीतर जाते ही नही हैं, हमारी अधिकतर यात्रा बाहर की है।

मेरा ये भी मानना है कि बुद्ध कभी यह नहीं कहते हैं कि यह काम बुरा है और वो काम अच्छा है। बुद्ध कहते हैं, जो बोधपूर्वक किया जाए, वह अच्छा है, जो बोधहीनता से किया जाए, वह बुरा। बोध अर्थात जागरूकता। जागरूकतापूर्वक जो भी काम किया जाये, वही पुण्य है और जो बात बेहोशी में ही की जा सके, वही पाप है। बुद्ध का कहना है कि जो भी काम किया जाए, वह जागरूकता या होश के साथ किया जाए।

एक ये भी की अहम् वृत्ति या “मैं” को गंवाना ही बुद्धत्व है, सन्त स्वभाव है, साधुता है। अपना दैनिक जीवन सरलता और सहजता से जीना ही प्रार्थना है।

याद रखिये की जो लोग प्रेम और भाव से भरे रहते हैं, सरल – सहज – विनम्र होते हैं, हृदय से भरे हुए होते हैं, वे आसानी से परमात्मा की तरफ चले जाते हैं, लेकिन अहंकारी, धूर्त, लंपट, बेईमान और मनमुख लोग सर के बल खड़े होकर भी उन तक नही पहुंच सकते हैं।

आप आज से ही अंतर यात्रा पर निकल पड़ें यानी के अनंत सुख और शांति की राह पर चल पड़ें तथा आपको जल्द ही परम् तत्त्वबोध और अखण्ड-आनन्द का अनुभव हो, ऐसी सब मेरी प्रभु से प्रार्थना हैं। मंगल शुभकामनाएं।

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