रविवारीय प्रार्थना – अपनी उच्चतम संभावना तक पहुंचना।

जैसे किसी भी पौधे का मूल उद्देश्य होता है अपनी उच्चतम संभावना तक पहुंचना यानी कि अपना बड़े से बड़ा फल – फूल देना, उसी प्रकार हम सब का मूल उद्देश्य भी अपनी उच्चतम सम्भावना तक पहुंचना होता है।

जैसे किसी गुलाब के पौधे पर सूरजमुखी नही लगते हैं और न ही ये संसार इस बात की उम्मीद करता है। लेकिन अगर समय से गुलाब के पौधे पर गुलाब न हों तो कुछ गड़बड़ है। उसी प्रकार जो आप कर सकते हैं, कह सकते हैं, सुन सकते हैं या हो सकते हैं अगर वो भी आप नही बन पाते हैं या हो पाते हैं तो गड़बड़ है। जिस हिसाब से आपको पल्लवित, फलित और पुष्पित होना था वो आप समय से नही हो पाये हैं तो कुछ गड़बड़ है।

आप को भी इन्ही पौधों की भांति अपने अपने डीएनए वंशाणु या genes के हिसाब से अपनी उच्चतम अवस्था, सम्भावना प्राप्त करनी है न कि कुछ दूसरा बनना है। इसीलिए अपनी जड़ों के पोषण की जरूरत के हिसाब से खाद पानी करते हुए जो सामर्थ्य और योग्यता आपके पास हैं (या जितना आप उन्हें विकसित कर सकते हैं) उसके हिसाब से अपनी उच्चतम सम्भावना तक पहुंचना ही आपके जीवन का मूल उद्देश्य है और ये समझ बनाये रखना और निरन्तर इस बात का प्रयास करते रहना ही प्रार्थना है। जो जीवन परमात्मा ने वरदानस्वरुप प्रदान किया है, उसका नियोजन उचित ढंग से करना, उसका संपोषण और उसका विस्तार करना ही प्रार्थना है। हँसते रहना और हँसाते रहना प्रार्थना है।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि आप सदैव स्‍वस्‍थ, सक्रिय एवं ऊर्जावान बने रहें तथा उच्चतम सम्भावना तक जल्द ही पहुंच जायें।

आपका दैनिक व्यवहार आपकी प्रार्थनाओं और आनंद की अनुकृति बना रहे और आप अच्छे कर्म करते हुए शतायु प्राप्त करें, ऐसी सभी कामनाओं के साथ साथ मैं अपने प्रभु जी से ये भी प्रार्थना करता हूँ कि आपके घर-आंगन में सदैव शुभता एवं मांगल्य की वर्षा होती रहे।

मंगल शुभकामनाएं 💐

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।

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