रविवारीय प्रार्थना – स्वयं को प्रार्थनाशील बनाना तथा अपने हर क्षण को प्रार्थनापूर्ण क्षण में बदल देना।

अगर आपकी पूजा, प्रार्थना का मूल कारण कोई लोभ, लालच या डर है, तो वे कभी सफल नहीं होंगी। यह समझने का समय आ गया है कि मंदिर-मस्जिद जाना तब तक व्यर्थ है जब तक हम अपनी मूर्खता का त्याग न कर दें।

यदि आप ईमानदारी से अपनी प्रार्थनाओं की जड़ देखेंगे, तो पाएंगे कि आपने कभी परम् की आकांक्षा ही नहीं की है। आपकी इच्छाएं सदैव भौतिक सुख-सुविधाओं, धन, शक्ति और अन्य क्षणभंगुर चीजों तक ही सीमित रही हैं। आप यह सोचते हैं कि ईश्वर उन सबको प्राप्त करने का साधन है, उपकरण है। परंतु यह बिल्कुल गलत है।

पतंजलि, जिन्हें आधुनिक योग का जनक माना जाता है, कहते हैं कि जब कोई वास्तव में प्रार्थना करना जान लेता है, तो प्रार्थना ईश्वर तक पहुंचने का साधन नहीं रहती, बल्कि ईश्वर स्वयं प्रार्थना करने का साधन बन जाता है। प्रार्थना एक  कृत्य नहीं, अपितु आनंददायक अनुभव, सुंदर घटना और उत्सव बन जाती है।

वास्तव में प्रार्थना कोई कृत्य नही है, अपितु एक स्वभाव, गुण और आंतरिक प्रवृत्ति है। प्रार्थनापूर्ण बनने का अर्थ है कि आपका संपूर्ण अस्तित्व एक अर्पण बन जाए। यह पूर्ण समर्पण की प्रक्रिया है। प्रार्थनापूर्ण होना हर चीज और हर जगह में विद्यमान ईश्वर के साथ गहरा संबंध स्थापित करना है। यह एक गुण है, एक अवस्था है। जैसे ही हम प्रार्थनापूर्ण बन जाते हैं, परम् और परमानंद प्राप्त हो जाते हैं।

मैं आपको एक बात और याद दिला दूँ की पशु-समान व्यवहार और कृत्यों से क्षणिक सुख तो किसी को भी प्राप्त हो सकता है, परंतु अनंत की अनुभूति, आंतरिक शांति और शाश्वत आनंद की प्राप्ति केवल उसी को हो सकती है जिसने न केवल अपने हर क्षण को प्रार्थनापूर्ण क्षण में बदल दिया है बल्कि जो शुभ एवं यथार्थवादी विचारों के साथ आत्मोन्नति के लिए भी निरंतर प्रयत्नशील रहता है।।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना करता हूँ कि आपके जीवन को जल्द ही शाश्वत आनंद और शांति से भर दें।

अत्यंत स्वस्थ, खुशहाल और सौभाग्यशाली जीवन की कामनाओं के साथ साथ मैं आज उनसे ये भी प्रार्थना करता हूँ कि आपके परिवार में सदा मंगल ही मंगल होता रहे तथा आप प्रसन्नतापूर्वक अपने लक्ष्यों की और अभीष्ट की प्राप्ति कर पायें। मंगल शुभकामनाएं 💐

श्री राम दूताय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।

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