रविवारीय प्रार्थना – ये समझ बनाये रखना की हमारे कर्म ही हमारे प्रारब्ध और भोग भाग्य का निर्माण करते हैं।

हमारे शास्त्रों ने, परम्पराओं ने, आस्था ने, हमारे गुरुजनों एवं सिद्धजनों ने हमें बताया है कि माँ गंगा भारत की मृत्युंजयी-वैदिक सनातन-संस्कृति की प्राणसत्ता है तथा मोक्षदायिनी एवं पापनाशिनी है… यह बिल्कुल सत्य है। किसी काल खण्ड में माँ गंगा पाप धोने का स्थान जरूर रही होगी, लेकिन वो केवल उन्ही अपराधों या पापों से मुक्ति दिलाती होंगी जो अनजाने में या मजबूरी में किए गए होंगे। लेकिन आज के आधुनिक समय में माँ गंगा को अपने पाप धोने का स्थान मानना बिल्कुल उचित नहीं है।

मुझे पता है पुण्य प्राप्त कर स्वर्ग में स्थान पाने की लालसा हर किसी के मन में होती है, लेकिन ये माँ गंगा के पवित्र जल में एक डुबकी लगा लेने मात्र से प्राप्त नही होगा। ये तो केवल और केवल शुभाशुभ और पुण्य कर्मों द्वारा ही प्राप्त होगा।

मेरी बात को अन्यथा न लें। मेरा तात्पर्य केवल यह है कि सफलता, यश, कीर्ति, सम्मान, पुण्यलाभ और हरि कृपा मात्र संयोग से या किसी shortcuts से नहीं मिलते हैं। यह सब आपके कठिन परिश्रम, अटूट आत्मविश्वास और निरंतर प्रयासों का परिणाम होते हैं। जो लोग अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का ईमानदारी से पालन करते हुए, जीवन की चुनौतियों का सामना हंसते-मुस्कुराते हुए करते हैं तथा अहोभाव में भरे रह कर अपने ईष्ट देव की पूजा-अर्चना, सत्संग, कीर्तन करते हैं, केवल वही इहलौकिक और पारलौकिक अनुकूलताएं और सफलतायें प्राप्त करते हैं।

अपने कर्मों का फल तो हमें भोगना ही पड़ेगा, चाहे अभी या बाद में। हमारा प्रारब्ध और भोग भाग्य हमारे कर्म, आचरण, सोच, विचार निर्धारित करते हैं, हमारे पापों को धो सकते हैं और पुण्य प्राप्त करा सकते हैं। इसका कोई दूसरा उपाय नहीं है। बस यही समझ बनाये रखना ही एक मायने में हमारे जैसे साधारण लोगों के लिये प्रार्थना है।

मुझे पूरी उम्मीद है कि जब हमारे चारों पीठों के मान्य शंकराचार्यों और सृष्टि में मौजूद सभी दिव्य साधु संतों का और करोड़ो साधकों का स्पंदन भी सुधा-सम्पन्न एवं भवतारक माँ गंगा के पवित्र गंगाजल में घुल रहा हो, तब आपकी इस बार की पवित्र जल में डुबकी आपको सद्गुण संपन्न कर देगी और आपको सत्यबोध करा देगी।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना करता हूँ कि माँ गंगा का स्मरण, आचमन और इस बार का ये महाकुंभ का स्नान आपके लिये सर्वथा कल्याणकारक साबित हो।

इस बार का ये महाकुंभ स्नान न केवल आपके शरीर को, बल्कि मन और बुद्धि को भी स्वस्थ कर दे, आनंद से भर दे तथा आपका आने वाला प्रत्येक नया दिन शुभ हो जाये, मंगलमय हो जाये, इन्ही सब मंगल शुभकामनाओं के साथ आप सभी को प्यार भरा नमस्कार 🙏🏼

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।

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