रविवारीय प्रार्थना – पीढ़ियों द्वारा संचित पुण्यों का बैलेंस जीरो करने की बजाय उन्हें कई गुणा बढ़ाना।

यह एक साधारण सी बात है जिसे हम सब जानते हैं कि सादगी भरा सरल और सहज जीवनशैली, प्राकृतिक नियमों का सम्मान, सनातन सिद्धांतों के प्रति अडिग निष्ठा, पारमार्थिक प्रवृत्ति, अपने-अपने धर्मानुसार शुभ कर्म करना और अपने आराध्य इष्ट के प्रति समर्पण-भावना व अहोभाव रखते हुए उनका नाम जप करना ही हमारे इस जीवन की सार्थकता का मूल आधार है, फिर चाहे आप कोई भी क्यों न हों और कहीं भी क्यों न हों, यह बात सबके लिए समान है।

किंतु, एक सत्य ऐसा है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं: समय के किसी भी काल खंड में, हमारे द्वारा किए गए किसी भी कर्म का फल कभी नष्ट नहीं होता। चाहे वह जानबूझ कर किया गया हो या अनजाने में, वह हमारे अस्तित्व के ‘महा-खाते’ में दर्ज हो ही जाता है। हमारे पिछले अनगिनत जन्मों की क्रियाएं एक विशाल ‘कार्मिक लेन-देन’ (Karmic Debt & Credit) के रूप में हमारे साथ चलती हैं।

जिसे हम ‘प्रारब्ध’ या ‘भाग्य’ का नाम देते हैं, वह वास्तव में इसी हमारे अपने पुराने लेन-देन का और कर्मों का लेखा-जोखा है। यह रविवारीय लेख इसी सत्य को दोहराने और आपको अपने Karmic Debt & Credit के प्रति सचेत करने के लिए है। आशा है कि यह आपको गहरे आत्म-चिंतन की ओर ले जाएगा।

सुखद बात ये है कि इस जीवन में हम सब अपने ऐच्छिक कर्मों द्वारा इसे बढाने घटाने के लिये स्वतंत्र हैं। असल में, इस कड़वे सत्य का बोध हो जाना ही हमारे आध्यात्मिक विकास की पहली सीढ़ी है।

अब इस बार के पुनर्जन्म में आप कर क्या रहे हैं—जरा इस पर गहराई से विचार करें। आपको क्या बंद करना है और क्या नया शुरू करना है, यह तय करने का समय आ गया है। मुझे तो लगता है कि अपने प्रारब्ध से मिली परिस्थितियों और जिम्मेदारियों का सम्मान करना, उन्हें खुशी-खुशी निभाना और उसी के बीच ‘नए शुभ कर्मों’ को जोड़ते जाना ही सच्ची प्रार्थना है। अपने कर्तव्यों का यथोचित रीति से पालन करते हुए पीढ़ियों द्वारा संचित पुण्यों को तेजी से आगे बढ़ाने का सचेत प्रयास ही प्रार्थना का असली स्वरूप है।

मैं आज अपने आराध्य प्रभु से यही प्रार्थना करता हूँ कि उनकी कृपा आप पर सदा बनी रहे। जीवन की इस यात्रा में आपने अब तक जो कुछ भी अर्जित और संचित किया है फिर चाहे वो यश हो, सम्मान हो, समृद्धि हो, बोध हो, अपने हों या फिर आपके पुण्य — वे सब उनकी कृपा से हमेशा अखंड रहे और उसमें दिन-प्रतिदिन वृद्धि होती रहे।

आप स्वस्थ रहें और आपको सतत् सुख-संतोष-सुकून व शांति का अनुभव हो इन्हीं अब मंगलकामनाओं के साथ आपको सप्रेम नमस्कार 🙏

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।

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