Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
आज इस रविवार की सुबह आपसे एक तीखा सवाल: क्या इस दौर की हवा आपको भी छूकर निकल गई है? क्या आपको भी लगने लगा है कि क्या स्वर्ग, मोक्ष, धर्म, पुण्य, यह सब बकवास है। ये सब केवल मूर्ख बनाने वाली बातें हैं? कि जीवन का कुल सार बस इतना ही है कि जो सामने है उसे भोग लो, जितना निचोड़ा जा सकता है निचोड़ लो, क्योंकि इसके बाद कुछ नहीं है? फिर दुबारा आना न होगा। न कोई आत्मा है, न कोई ईश्वर, न कोई अमरत्व है।
अगर आपकी बुद्धि इसी सोच पर आकर रुक गई है, तो फिर किसी तर्क-वितर्क का कोई अर्थ नहीं रह जाता। आपको आपका यह नज़रिया मुबारक हो। मगर एक सनातन सत्य याद रखिएगा—हमारा हर दृष्टिकोण, हमारा हर विचार, हमारा हर कर्म अपने भीतर एक परिणाम छुपाए रखता है। वह परिणाम चाहे इस जीवन में सामने आए, या फिर मृत्यु के पार अगले जन्मों की यात्रा में; समय अपना हिसाब पूरा ज़रूर करता है। और जब वह फल सामने आएगा, तब उसके जिम्मेदार केवल और केवल आप ही होंगे, अन्य कोई नहीं।
और अगर आपके भीतर का एक छोटा सा हिस्सा अब भी इस कोलाहल को स्वीकार नहीं कर पा रहा है; अगर आपको अब भी उस सनातन सत्य पर भरोसा है; अगर आप देख पा रहे हैं कि अधर्म चाहे कितना भी आलीशान और ताकतवर क्यों न दिखे, वह सिर्फ क्षणिक है; और अगर आपका विश्वास कहता है कि जीत अंततः सत्य, न्याय और धर्म की ही होगी—तो रुकिए, यह लेख आपके लिए है।
आज के समय की सबसे बड़ी त्रासदी यह नहीं है कि चारों तरफ मलिनता, दुष्टता और नीचता बढ़ रही है। ये सब तो समाज का हिस्सा हमेशा से रही है और शायद आगे भी रहेगी। असली त्रासदी तो यह है कि इन प्रवृत्तियों को लगातार देखते-देखते, सहते-सहते हमारा अपना मन थकने लगता है, भीतर का हौसला टूटने लगता है। एक समय ऐसा आता है जब मन इस नकारात्मकता को, इस नीचता, दुष्टता और धोखाधड़ी को ही जीवन जीने का एकमात्र साधन मानने लगता है। हम यह मान बैठते हैं कि इस से बचने का कोई रास्ता नहीं है, इसलिए इसी का हिस्सा बन जाना ही बुद्धिमानी है। बुराई की अंतिम विजय तब नहीं होती जब वह जीतती है, बल्कि तब होती है जब वह एक भले इंसान को यह विश्वास दिला देती है कि ईमानदारी एक मूर्खता है और चालाकी ही एकमात्र सत्य है। बस यही वह निर्णायक क्षण होता है जहाँ हमें खुद को बचाना होता है।
और ठीक इसी मोड़ पर, जब चारों तरफ का यह कीचड़ आपके अंतःकरण को लीलने की कोशिश कर रहा हो, तब हार मानकर घुटने टेक देने के बजाय अपने तन और मन को निर्मल व स्वच्छ बनाए रखने के लिए किया गया एक-एक छोटा सा श्रम भी इस दौर की सबसे बड़ी प्रार्थना बन जाता है।
जब संसार की मलिनता आपको अपने रंग में रंगने की ज़िद पर अड़ी हो, तब अपने बिखराव और भटकाव को समेटना, अपने भीतर की पवित्रता की रक्षा करना और अपनी आत्मा को उसके मूल, शांत और शाश्वत स्वरूप की ओर वापस ले जाने का सचेत, साहसी प्रयास ही प्रार्थना है। याद रखिये कि हमारी रोजाना की गई प्रार्थना – ईश्वर को पाने की नहीं, स्वयं को बदलने की साधना है।
आज मेरी अपने आराध्य प्रभु जी से यही प्रार्थना है कि यह अलौकिक सुबह आपके जीवन के सारे कुहासे और असमंजस को साफ कर दे। आपको चेतना की एक ऐसी स्पष्टता मिले, जो बाहर के हर भ्रम, हर प्रलोभन और हर शोर के बावजूद भी, आपके भीतर एक चट्टान की तरह अडिग और अविचल खड़ी रहे।
आप सदैव स्वस्थ और प्रसन्नचित रहें। आपके भीतर की आत्मिक शुद्धि, सरलता और सौम्यता समय के थपेड़ों के बीच भी हमेशा सुरक्षित रहे। बाहर की परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, आपके भीतर का ब्रह्मप्रकाश तथा असीम शांति कभी भंग न हो—इन्हीं गहरी और आत्मीय मंगल कामनाओं के साथ, आपको सप्रेम नमस्कार 🙏
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।
