रविवारीय प्रार्थना – अपने उस ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करना जिसने आपकी दुनिया को थाम रखा है तथा अपने आत्मस्वरूप में ब्रह्मरूपता की अनुभूति करना प्रार्थना है।

आपका तो पता नहीं, लेकिन सच यह है कि अधिकांश लोग सप्ताह के छह दिन एक अंतहीन दौड़ में बिता देते हैं – लक्ष्यों का पीछा करते, बेहतर की तलाश करते हुए, उम्मीदें बुनते और खुद को साबित करने की होड़ में उलझते हुए। पैसा, रुतबा और सफलता चाहना हो या फिर बुद्धत्व और मुक्ति की तलाश, इन सब की अपनी जगह है और अपनी-अपनी जगह ये सभी प्रयास जरूरी हैं। लेकिन रविवार के दिन विश्व भर में लोग अपने अपने प्रार्थना स्थलों की ओर रुख करते हैं, ताकि कुछ पल सनातन सत्यों से जुड़ सकें और उस ईश्वर का धन्यवाद कर सकें जिसने उनकी सम्पूर्ण सृष्टि को थाम रखा है।

मंदिर में प्रवेश करते ही मन की सारी आपाधापी जैसे पीछे छूट जाती है (और ईमानदारी से कहें तो छूट ही जाना चाहिए 🫣)। अपने आराध्य के दर्शन, घंटियों की गूँज और धूप-दीप की महक मन के भीतर एक गहरा सुकून और शांति लाती है। आपका तो पता नहीं, लेकिन हम जैसे अनगिनत लोगों के लिए ये चंद पल किसी वरदान से कम नहीं होते। यह वह समय होता है जहाँ हम सफलता-असफलता, लाभ-हानि, प्रशंसा-निंदा और संयोग-वियोग के द्वंद्व और शोर से बाहर निकल कर अपने भीतर धर्म, विनम्रता, पवित्रता और खुद को बेहतर इंसान बनाने की एक नई लौ को प्रजवल्लित करते हैं और अपने ईश्वर की ओर लौटने की आकांक्षा को फिर से जीवित करते हैं।

तो फिर देर किस बात की? क्यों न आज ही हम अज्ञानजन्य अवसाद – आलस्य और अहंकार, अपनी अपेक्षाओं तथा कंडीशनिंग तथा अपने दिखावटी पाण्डित्य, बाह्य उपलब्धियाँ और लौकिक सफलताओ की परतों के नीचे जो हमारा असली, दिव्य ब्रह्मस्वरूप रूप दबा बैठा है—उसे  उजागर करे हैं। सच तो यह है कि प्रार्थना ईश्वर के प्रति केवल आभार प्रकट करने की औपचारिकता नहीं, बल्कि अपने आत्मस्वरूप में ब्रह्मरूपता की अनुभूति है, उस अनुभूति के लिये किया गया सचेत प्रयास है।

आज मैं अपने आराध्य प्रभु जी से विनती करता हूँ कि उनकी कृपा से आपका ये जीवन केवल सुख-सुविधाओं, अनुकूलताओं और बाह्य उपलब्धियों तक ही सीमित न रह जाए; बल्कि आपकी सोच का दायरा सीमाओं को तोड़कर अनंत हो जाए और आपके भीतर छिपा वह सुंदर देवत्व पूरी चमक के साथ खिल उठे।

आपके जीवन में शान्ति, समाधान, आरोग्य, समृद्धि, सद्बुद्धि, भक्ति और आत्मानन्द का अखण्ड प्रकाश सदा बना रहे, इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ आपको सप्रेम नमस्कार 

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।

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