Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
मुझे आपका तो पक्का पता नही लेकिन दुनिया में ज़्यादातर लोग सुबह से शाम तक जो भी अच्छा या बुरा कर रहे हैं उसका अंतिम ध्येय केवल एक है—दैवीय अनुग्रह, लोक-परलोक की अनुकूलताएं, सुकून और सफलतायें प्राप्त करना 🤫
अब सवाल उठता है कि क्या इन्हें पाना असंभव है, क्या यह कुछ खास लोगों के लिए ही मुमकिन है, क्या यह तलवार की धार पर चलने जैसा है, वगैरह-वगैरह… इसका जवाब है – बिल्कुल नहीं। यह हम में से हर एक के लिए सहज संभव है 💯⚡
वह आनंद, सुख, शांति, रस, दैवीय अनुग्रह और पूर्णता प्राप्त करना—जिसके आप वास्तव में अधिकारी हैं—बेहद आसान है। इन्हें पाना उतना ही आसान है जितना किसी कली का चुपचाप फूल बन जाना। इसके लिए न किसी लाउडस्पीकर का शोर चाहिए, न कोई हायतौबा, चालाकी या तिकड़मबाजी। ज़रूरत सिर्फ इतनी है कि आज बिस्तर से उठने के साथ-साथ अपनी चेतना को भी एक स्तर ऊपर उठाइए 💪
आज इस रविवारीय लेख में मैं बस इतना ही कहना चाहता हूं कि आज जब बेड से उठें तो केवल आम दिनों की भांति जागिये मत, अपनी चेतना को भी जागृत करिए। अपने आचार, विचार और व्यवहार के स्तर को भी कल के मुकाबले एक स्तर ऊपर उठाइये तथा हर पल और हर आती-जाती सांस के साथ सचेत, सजग और जागरूक रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करिए भगवद् भाव से अपने दैनिक कार्य कीजिये।
इसीलिए, मेरी दृष्टि में बाहर भटकने के बजाय आत्म-बोध और अस्तित्व-बोध की ओर निरंतर अग्रसर रहना ही प्रार्थना है। आप जो कुछ भी करें (या न करें), उसे पूर्ण सजगता, संतुलन और आध्यात्मिक दृष्टि से करना ही प्रार्थना है। सनातन मूल्यों, शाश्वत सत्यों और ब्रह्म-वृत्ति को न केवल जानना, बल्कि उन्हें निरंतर पोषित और पुष्ट करना ही वास्तविक प्रार्थना है 🙏🙏
मैं आज अपने आराध्य प्रभु जिससे प्रार्थना करता हूं कि आपका शेष जीवन बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि आंतरिक प्रकाश से परिभाषित हो। आपके आत्मबोध और ब्रह्मनिष्ठा के दीपक का प्रकाश न केवल आपका मार्ग सुगम करे, बल्कि औरों के लिए भी उजाले का सबब बने।
आप जल्द ही ब्रह्मस्वरूप के जीवित प्रतीक बनें और प्रभु के अनुग्रह व करुणा का प्रसार बनकर धन्य व वंदनीय हो जाएं। स्वस्थ तथा प्रसन्नचित्त रहकर अपने इस मानव-जन्म के सभी प्रयोजन सिद्ध कर पाएं—इन्हीं सब मंगल कामनाओं के साथ आपको सप्रेम नमस्कार।
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।
