रहस्यमय ईश्वर तथा सच

दूर किसी जगह छुपे हुये रहस्यमय ईश्वर तक पहुँचने की बजाये आपको अपनी नाक के नीचे हो रही दुष्टता, असाधुता तथा धूर्तता को पहचानने की जरूरत है। उसे तुरंत रोकने की जरूरत है। आपको अगर उस आनंद, परम् शान्ति और प्रकाश के स्रोत को पाना है तो सबसे पहले अपने भीतर के अंधकार को पहचानना होगा। अपने घट के भीतर ज्ञान के दिये को जला कर इस अंधकार को मिटाना होगा।

मेरा ऐसा विचार है की आपको असल मे किसी और नये सच को या उस रहस्यमय ईश्वर को ढूंढने की बहुत जरूरत नही है। आप तो खुद उसी ईश्वर के अंश हैं जिसको आप ढूंढ़ना चाहते हैं या पाना चाहते हैं। अगर आपको कुछ ढूंढना ही है तो अपने भीतर की बुराईयों, दुर्बलताओं, दोषों, हीन भावनाओं, बड़बोलेपन एवं सबसे अधिक ज्ञानी होने के घमंड को ढूंढें जिसके नीचे आपकी सच्चाई, श्रेष्ठता और सुंदरता दब गई है तथा आपका अपना ईश्वरत्व खो सा गया है।

अपने उस सचिदानन्द और सर्वशक्तिमान रूप को जल्द ही अनुभव करें तथा प्रकट होने दें। आपकी शुभता, सकारात्मकता, आरोग्यता, प्रभुता एवं विपुलता जल्द ही कई गुना बढ़ जाये, ऐसी मेरी प्रभु से प्रार्थना है। मंगल शुभकामनाएं। 💐💐

Lord Hanuman Ji, Pracheen Hanuman Mandir Connaught Place, New Delhi

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